विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने को लेकर केंद्र से सिफारिश का प्रस्ताव सत्ता पक्ष ने सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि विपक्ष इस प्रस्ताव के पारण के समय मौन रहा, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायक दल से दो बार इसका समर्थन करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार से प्रदेश के लिए प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 12 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने का आग्रह किया।
इस प्रस्ताव के पारण के बाद मुख्यमंत्री ने विपक्ष के खिलाफ हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि विधानसभा में भाजपा का प्रदेश विरोधी चेहरा बेनकाब हुआ है। हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने पर नियम 102 पर संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा सोमवार को प्रश्नकाल को निलंबित कर शुरू की गई, जिस पर बुधवार को शाम 7:30 बजे तक सत्ता पक्ष और विपक्ष सहित निर्दलीय विधायकों ने चर्चा में भाग लिया। प्रस्ताव पारित होने के बाद दोनों पक्षों में आराेप-प्रत्यारोप के बीच हंगामा और नारेबाजी भी हुई।
इस प्रस्ताव को सदन में पारित होने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में मानसून ने तबाही मचाई है। 441 लोगों की जानें गईं। लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, बिजली बोर्ड, पर्यटन विभाग को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। जिला किन्नौर, लाहौल-स्पीति, मंडी, सोलन, शिमला जिले आपदा से प्रभावित हुए। हिमाचल के कसौल, मणिकर्ण, भावा घाटी में हजारों पर्यटक फंस गए, उन्हें रेस्क्यू करके निकाला। लोग घर से बेघर हो गए। 255 परिवारों को राहत शिविरों में ठहराया। 12,000 लोग इससे प्रभावित हुए। लोगों के लिए घर कैसे बनाए जाएं, अब सरकार इस पर विचार कर रही है।
आपदा राहत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की गई। अभी तक केंद्र से राहत राशि नहीं मिली। प्रदेश की जनता, कर्मचारियों, विधायकों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसे दिए। सीएम ने कहा कि हिमाचल में प्राकृतिक आपदा को लेकर आईआईटी मंडी की सिफारिश लागू होगी। लाहौल-स्पीति समेत अन्य जिलों में आपदा को लेकर आब्जर्वर सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
बांधों से बिना सूचना पानी छोड़ने के मामले की होगी जांच
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान बांधों से बिना सूचना पानी छोड़ने के मामले की जांच होगी। उन्होंने कहा कि बांधों का पानी छोड़ने से मंडी और कांगड़ा के क्षेत्रों में तबाही मची है। घर ढह गए। उपजाऊ जमीनें पानी के साथ बह गईं। कई लोगों की जानें गई हैं। उन्होंने कहा कि डैम में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित नहीं की गई है। यह गंभीर मामला है। सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने आपदा को लेकर चर्चा में यह मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी जांच की गई। यह बात सही पाई गई है। इसके चलते जांच के आदेश दिए गए हैं।