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Himachal: सदन में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पारित, केंद्र से 12 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की मांग

Wed, 20 Sep 2023 10:45 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने को लेकर केंद्र से सिफारिश का प्रस्ताव सत्ता पक्ष ने सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया। 
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हिमाचल विधानसभा शिमला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने को लेकर केंद्र से सिफारिश का प्रस्ताव सत्ता पक्ष ने सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि विपक्ष इस प्रस्ताव के पारण के समय मौन रहा, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायक दल से दो बार इसका समर्थन करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार से प्रदेश के लिए प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 12 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने का आग्रह किया।

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इस प्रस्ताव के पारण के बाद मुख्यमंत्री ने विपक्ष के खिलाफ हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि विधानसभा में भाजपा का प्रदेश विरोधी चेहरा बेनकाब हुआ है। हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने पर नियम 102 पर संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा सोमवार को प्रश्नकाल को निलंबित कर शुरू की गई, जिस पर बुधवार को शाम 7:30 बजे तक सत्ता पक्ष और विपक्ष सहित निर्दलीय विधायकों ने चर्चा में भाग लिया। प्रस्ताव पारित होने के बाद दोनों पक्षों में आराेप-प्रत्यारोप के बीच हंगामा और नारेबाजी भी हुई।

इस प्रस्ताव को सदन में पारित होने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में मानसून ने तबाही मचाई है। 441 लोगों की जानें गईं। लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, बिजली बोर्ड, पर्यटन विभाग को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है। जिला किन्नौर, लाहौल-स्पीति, मंडी, सोलन, शिमला जिले आपदा से प्रभावित हुए। हिमाचल के कसौल, मणिकर्ण, भावा घाटी में हजारों पर्यटक फंस गए, उन्हें रेस्क्यू करके निकाला। लोग घर से बेघर हो गए। 255 परिवारों को राहत शिविरों में ठहराया। 12,000 लोग इससे प्रभावित हुए। लोगों के लिए घर कैसे बनाए जाएं, अब सरकार इस पर विचार कर रही है।
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आपदा राहत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की गई। अभी तक केंद्र से राहत राशि नहीं मिली। प्रदेश की जनता, कर्मचारियों, विधायकों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसे दिए। सीएम ने कहा कि हिमाचल में प्राकृतिक आपदा को लेकर आईआईटी मंडी की सिफारिश लागू होगी। लाहौल-स्पीति समेत अन्य जिलों में आपदा को लेकर आब्जर्वर सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

बांधों से बिना सूचना पानी छोड़ने के मामले की होगी जांच
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान बांधों से बिना सूचना पानी छोड़ने के मामले की जांच होगी। उन्होंने कहा कि बांधों का पानी छोड़ने से मंडी और कांगड़ा के क्षेत्रों में तबाही मची है। घर ढह गए। उपजाऊ जमीनें पानी के साथ बह गईं। कई लोगों की जानें गई हैं। उन्होंने कहा कि डैम में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित नहीं की गई है। यह गंभीर मामला है। सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने आपदा को लेकर चर्चा में यह मामला उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी जांच की गई। यह बात सही पाई गई है। इसके चलते जांच के आदेश दिए गए हैं।

हिमाचल में रोने वाली सरकार : सुखराम

 हिमाचल विधानसभा में नियम-102 के तहत लाए गए संकल्प पर तीसरे दिन चर्चा में भाग लेते हुए विधायक सुखराम चौधरी ने कहा कि लोग अब प्रदेश सरकार को रोने वाली सरकार कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर जगह यही बोल रही है कि पैसा नहीं है। उन्होंने कहा के प्रदेश को विशेष पैकेज मिलना चाहिए, इसका समर्थन वह करते हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार को विधानसभा चुनावों में दी हुई गारंटियां भी पूरी करनी चाहिए। इसके साथ ही कई अन्य विधायकों ने भी चर्चा में भाग लिया।

सत्ती बोले, रिक्त पड़े तीनों मंत्री पद भरें मुख्यमंत्री

 भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि हिमाचल में आई आपदा ने विकास की गति का रोक दिया। निमार्णधीन फोरलेन ,रेलवे लाइन सहित अन्य विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोई जनप्रतिनिधि क्रशर, फैक्ट्री, होटल चलाता है तो उसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस तरह के कारोबार से लोगों को रोजगार भी मिलता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रिक्त पड़े मंत्री के तीनों पद भरें।

प्रदेश को होगा नुकसान : भवानी पठानिया

भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि अगर हिमाचल में आई आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया जाता है तो इससे प्रदेश को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय आपदा घोषित होती है तो जो पैसा हिमाचल को पटरी पर लाने के लिए मिलेगा उसका 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य सरकार वहन करेंगी।

आपदा से बहुत कुछ सीखा : विक्रमादित्य

 लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश पर भले ही आपदा आई है लेकिन इससे सीखने को भी बहुत कुछ मिला है। प्रदेश में आई आपदा पर विधानसभा में चल रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि आपदा में जो भी कमी सड़क निर्माण में सामने आई है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि प्रदेश में जिस समय आपदा अपने चरम पर थी उस समय 1320 सडकें बंद थी और अब इनमें से अधिकांश को खोल दिया गया है।

खनन बहाली को बनेगी योजना

हिमाचल प्रदेश में खनन बहाली को लेकर योजना तैयार की जाएगी। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने प्राकृतिक आपदा पर चर्चा के दौरान खनन को लेकर सवाल उठाए। चर्चा के बाद उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि नदी नालों में हर साल साढ़े सात लाख टन रेत बजरी आती है। नदियों में पानी के बहाव के चलते यह पंजाब व अन्य राज्यों में जा रही है। इसे में नदी के किनारे खनन को लेकर योजना बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा की हर साल 69 टन रेत, बजरी निकली जाती है। जो 10 फीसदी है। सतलुज, ब्यास, यमुना आदि सहायक नदियों में 28 से 30 फीसदी सिल्ट आती है। इस बार प्राकृतिक आपदा के चलते नदी नालों में बड़ी सिल्ट आई है। डैम में सिल्ट जमा हो गई। पानी ऊपर आता गया। डैम के डेंजर प्वाइंट से ऊपर बढ़ने से फाटक खोलने पड़े। इसे आबादी वाले इलाकों में नुकसान हुआ है। इसे में खनन नियमों को रिव्यू करने की जरूरत है। इसके लिए अधिकारियों के साथ बैठकर खनन के लिए प्लान बनाया जाएगा।
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महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण पर पीएम मोदी का आभार

 विधायक रीना कश्यप ने कहा कि सरकार के केवल तीन ही मंत्री यहां पर बैठे हैं। विपक्ष की संख्या सत्ता पक्ष से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान की बात करने वाले जब उनके विधानसभा क्षेत्र में आए तो उन्हें सूचना तक देना उचित नहीं समझा। बार-बार महिला के मान-सम्मान की बात करते हैं, लेकिन बुलाया नहीं जाता। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री ही हैं जो उनका मान-सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने नारी शक्ति बंधन अधिनियम को स्वीकृति दी है। जिसमें महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा। इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने पंचायत में पट्टिका लगाए जाने के मामले में प्रधान को नोटिस जाने का मामला भी उठाया है। इसके अलावा कई भाजपा और कांग्रेस विधायकों ने आपदा को लेकर अपने अपने विधानसभा क्षेत्र की बात रखी।
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