लोगों के पैरों में छाले एवं फोड़े जैसी समस्या बढ़ती जा रही है। इसे डायबीटिक फुट कहा जाता है। चिकित्सकों के अनुसार हर दूसरा व्यक्ति डायबिटिक रोग से पीड़ित है। जिन लोगों को डायबिटीज की शिकायत है उनमें से कुछ लोगों के पैरों के नीचे वाले हिस्से में फोड़े और छेद होने शुरू हो जाते हैं। इस बीमारी को फुट अल्सर भी कहा जाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज न किया गया तो यह रोग व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकता है। आईजीएमसी अस्पताल की ओपीडी तथा यूनिट दो से पांच मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। समय रहते इलाज मिलने से इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
यह बात सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. भावेश देवकरन ने कही। आईजीएमसी में गोल्डन जुबली के मौके पर सर्जरी विभाग (वाउंडकोन) नेशनल कांफ्रेंस ऑफ इंडियन सोसाइटी की ओर से करवाई गई। सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एके अत्री और सेक्रेटरी डॉ. सिद्धार्थ दुबहाशी मौजूद रहे। डॉ. आरके शर्मा, डॉ. पियूष कपिला, डॉ. वीके शुक्ला, डॉ. एम साहू, डॉ. सिद्धार्थ दुभाषी, डॉ. जगदीश गुप्ता, डॉ. सोम प्रकाश
बसु, डॉ. दिग्विजय सिंह, डॉ. एसएस पांडे, डॉ. भावेश देवकरण, डॉ. संजीव प्रसाद, डॉ. अनिल मल्होत्रा, डॉ. सुरेंद्र ठाकुर और अशोक अत्री ने स्पीच दी। डॉ. केएस जसवाल, डॉ. पुनीत महाजन, डॉ. अनिल मल्होत्रा, डॉ. संजीव, डॉ. संजीव प्रसाद, डॉ. आरएस जोबटा, डॉ. सुरेंद्र ठाकुर, डॉ. पीसी सूद, डॉ. एके अत्री, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. रमेश भारती, डॉ. डीसी मारवाह, डॉ. दलीप गुप्ता, डॉ. कमल जसवाल और डॉ. अरुण गुप्ता मौजूद रहे।