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शोध में खुलासा, पैरों को गैंगरीन की चपेट में ले सकती है यह बीमारी

Mon, 11 Jul 2016 11:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
लोगों के पैरों में छाले एवं फोड़े जैसी समस्या बढ़ती जा रही है। इसे डायबीटिक फुट कहा जाता है। चिकित्सकों के अनुसार हर दूसरा व्यक्ति डायबिटिक रोग से पीड़ित है। जिन लोगों को डायबिटीज की शिकायत है उनमें से कुछ लोगों के पैरों के नीचे वाले हिस्से में फोड़े और छेद होने शुरू हो जाते हैं। इस बीमारी को फुट अल्सर भी कहा जाता है।


चिकित्सकों का कहना है कि अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज न किया गया तो यह रोग व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकता है। आईजीएमसी अस्पताल की ओपीडी तथा यूनिट दो से पांच मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। समय रहते इलाज मिलने से इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

यह बात सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. भावेश देवकरन ने कही। आईजीएमसी में गोल्डन जुबली के मौके पर सर्जरी विभाग (वाउंडकोन) नेशनल कांफ्रेंस ऑफ इंडियन सोसाइटी की ओर से करवाई गई। सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एके अत्री और सेक्रेटरी डॉ. सिद्धार्थ दुबहाशी मौजूद रहे। डॉ. आरके शर्मा, डॉ. पियूष कपिला, डॉ. वीके शुक्ला, डॉ. एम साहू, डॉ. सिद्धार्थ दुभाषी, डॉ. जगदीश गुप्ता, डॉ. सोम प्रकाश


बसु, डॉ. दिग्विजय सिंह, डॉ. एसएस पांडे, डॉ. भावेश देवकरण, डॉ. संजीव प्रसाद, डॉ. अनिल मल्होत्रा, डॉ. सुरेंद्र ठाकुर और अशोक अत्री ने स्पीच दी। डॉ. केएस जसवाल, डॉ. पुनीत महाजन, डॉ. अनिल मल्होत्रा, डॉ. संजीव, डॉ. संजीव प्रसाद, डॉ. आरएस जोबटा, डॉ. सुरेंद्र ठाकुर, डॉ. पीसी सूद, डॉ. एके अत्री, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. रमेश भारती, डॉ. डीसी मारवाह, डॉ. दलीप गुप्ता, डॉ. कमल जसवाल और डॉ. अरुण गुप्ता मौजूद रहे।
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यह है डायबीटिक फुट

आईजीएमसी में जुटे डॉक्टर्स।
लंबे समय तक डायबिटीज की शिकायत होने पर नसों तथा नाड़ियों को नुकसान होने लगता है। इस कारण पैर संवेदनशीलता खोने लगते हैं। उनमें स्पर्श या दर्द अथवा पीड़ा का अहसास नहीं होता है। व्यक्ति की त्वचा (एनहायड्रोसिस) सूखने लगती है। जिसमें कि दरार पड़ती है। और जख्म होने शुरू हो जाते हैं। छाला और फोड़ा होने पर गैंगरीन रोग जैसी भयानक शक्ल ले लेता है।

क्यों होता है
ब्लड शुगर पर नियंत्रण न होना और गलत जूते पहनना भी डायबिटिक फुट का कारण है।

बचाव के तरीके
जिन व्यक्तियों को डायबिटिक है उन्हें अपने ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखना होता है। इसके अलावा अपने पैरों में दरार पड़ने पर उसमें क्रीम लगानी चाहिए। ताकि मरीजों के पैरों में दरार होने से व्यक्ति को कोई परेशानी न हो। उधर चिकित्सकों का कहना है कि ज्यादा टाइट जूते पहनने से भी परहेज करना चाहिए।

शंका पैदा होने पर पहुंचे अस्पताल
अगर किसी भी व्यक्ति के पैरों में फोड़े या छाले होने शुरू हो जाते हैं तो मरीजों को तुरंत अस्पताल में आकर उपचार करवाना चाहिए। वहीं एक्सरे में पता चले कि संक्रमण हड्डी में है तो इसका उपचार डॉक्टर अलग तरीके से करेंगे नही तो सर्जरी करके भी मरीजों को उपचार दिया जा सकता है। -प्रोफेसर केएस जसवाल, - विभागाध्यक्ष सर्जरी आईजीएमसी

विजय चंदेल ने पाया पहला स्थान
पेपर प्रेजेनटेशन में आईजीएमसी के डॉ. विजय चंदेल पहले, डॉ. विजय गणेशन दूसरे और इसी कॉलेज के डॉ. विपलव ने तीसरा स्थान हासिल किया। वही पोस्टर मेकिंग में जीएमसीएच चंडीगढ़ कॉलेज की डॉ. शिवानी गोयल ने पहला, पीजीआईएमएस रोहतक डॉ. राकेश सिंह जबकि आईजीएमसी कॉलेज के डॉ. तुषार और डॉ. गरिमा शर्मा ने तीसरा स्थान पाया।
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