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Shimla News: अनाडेल में मंजूरी से अधिक पहाड़ी की कटाई करने पर रिपोर्ट तलब

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हाईकोर्ट ने नगर निगम को दोबारा मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार करने के दिए हैं आदेश, देवदार के पेड़ों के गिरने का है खतरा
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मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के अनाडेल रोड के पास एक आवासीय परियोजना में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे पहाड़ी के कटान और देवदार के पेड़ों को पहुंचाए जा रहे नुकसान पर स्वयं कड़ा संज्ञान लिया है।
अंधाधुंध खोदाई के कारण साइट पर मौजूद देवदार के चार पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा है। खोदाई की वजह से देवदार के पेड़ों की जड़ें पूरी तरह बाहर आ गई हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने नगर निगम शिमला को साइट की दोबारा जांच कर एक नई रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने नगर निगम शिमला को निर्देश दिए हैं कि वह मौके की तस्वीरों की दोबारा जांच करें और कटान की सटीक गहराई तथा ढलान की ऊंचाई को लेकर एक नई रिपोर्ट अदालत में पेश करें। इस ताजा रिपोर्ट के आने के बाद ही सुरक्षा दीवार बनाने की अनुमति पर विचार किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी। खंडपीठ ने वन विभाग और नगर निगम द्वारा पहले सौंपी रिपोर्टों पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी क्षेत्र की सही निगरानी करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। डीएफओ शिमला द्वारा दायर हलफनामे में स्पष्ट किया है कि यह पेड़ बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं और भारी बारिश के दौरान कभी भी गिर सकते हैं।
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अदालत के आदेशों के बाद मामले की संयुक्त साइट निरीक्षण रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार विमला देवी (जीपीए रणबीर बिमटा) के पक्ष में एक निजी आर्किटेक्ट द्वारा 500 वर्ग मीटर के प्लॉट पर आवासीय निर्माण की मंजूरी दी थी। इसके लिए केवल 3.50 मीटर तक पहाड़ी काटने की अनुमति थी लेकिन मौके पर औसतन 7 मीटर गहरा कटान पाया गया जोकि तय सीमा से बिल्कुल दोगुना है।हाईकोर्ट ने नगर निगम की ओर पेश की गई इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि 18 मई को निरीक्षण के दौरान मौके पर कोई मशीनरी नहीं थी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत ने इस मामले पर खुद 18 मई को संज्ञान लिया था। वन विभाग और निगम के हलफनामे सही तस्वीर पेश नहीं करते हैं। इससे साफ है कि अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में पहले कोई गश्त (पेट्रोलिंग) नहीं की गई।
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वन विभाग ने दर्ज करवाया है मामला
वन विभाग ने इस नुकसान के लिए आरोपी के खिलाफ नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 339 और 352 के तहत मामला दर्ज करवाया है। आरोपी पक्षों ने पेड़ों और पहाड़ी को बचाने के लिए तुरंत एक रिटेनिंग वॉल (दंगा) लगाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि अदालत ने साफ किया कि इस प्रार्थना पर विचार तभी किया जाएगा, जब नगर निगम शिमला पहाड़ी की कटाई की वास्तविक गहराई और ढलान को लेकर एक नई और सटीक निरीक्षण रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करेगा। मामले की अगली सुनवाई अब 29 मई को होगी जिसमें तीनों विभागों (नगर निगम, टीसीपी और वन विभाग) की संयुक्त भूमिका और आगामी कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।
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