12 फीसदी जीएसटी वसूलने का था प्रस्ताव
कारोबारियों के पास पड़ा है पिछला स्टॉक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में अभी रेडीमेड कपड़े महंगे नहीं होंगे। कपड़ों पर जीएसटी की दर अभी पांच फीसदी ही रहेगी। जीएसटी परिषद की शुक्रवार को हुई बैठक में लिए फैसले से आम लोगों के साथ शहर के सैकड़ों कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।
पहली जनवरी से रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी की दर 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने का फैसला लिया था जिसे शुक्रवार को हुई बैठक में टाल दिया गया है। इस फैसले के बाद जहां रेडीमेड कपड़े महंगे होने थे वहीं कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा था। शिमला व्यापार मंडल के अनुसार शहर के सैकड़ों कारोबारियों ने शिमला में विंटर टूरिस्ट सीजन और बर्फबारी को देखते हुए अक्तूबर-नवंबर में ही रेडीमेड कपड़ों का स्टॉक मंगवा रखा है। यह स्टॉक पांच फीसदी जीएसटी पर खरीदा था। ज्यादातर सैलानियों के पास अभी भी काफी मात्रा में पिछला स्टॉक पड़ा हुआ है। कारोबारियों का कहना है कि यदि जीएसटी की दर बढ़ती तो पहली जनवरी से इन्हें इसी पुराने स्टॉक को बेचने पर 12 फीसदी जीएसटी भरना पड़ना था। इससे कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा था। अब कारोबारियों के पास अपना पिछला स्टॉक निकालने का वक्त मिलेगा।
जनता-कारोबारियों को राहत : सरना
रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी की दर नहीं बढ़ेगी जिससे यह महंगे नहीं होंगे। इस फैसले से जहां जनता को राहत मिलेगी, वहीं कारोबारियों को भी अपना पुराना स्टॉक निकालने का वक्त मिल जाएगा।
-अजय सरना, उपाध्यक्ष शिमला व्यापार मंडल
महंगे हो जाएंगे जूते-चप्पल
जीएसटी काउंसिल ने फुटवियर पर बढ़ाए गए जीएसटी के फैसले को बरकरार रखा है। पहली जनवरी से जूतों और चप्पलों की खरीद पर पांच की जगह 12 फीसदी जीएसटी वसूला जाएगा। इससे फुटवियर अब पहले से महंगा मिलेगा। शहर के कई कारोबारियों को भी अब पुराना स्टॉक नई दरों पर बेचना पड़ेगा।
दूसरे व्यापार मंडल ने जताया आभार
वहीं, संजीव ठाकुर की अगुवाई वाले शिमला व्यापार मंडल ने रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी न बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है। अध्यक्ष संजीव ठाकुर ने कहा कि उन्होंने इस फैसले पर पहले ही विरोध जता दिया था। बाकायदा ज्ञापन भी प्रशासन को सौंपा था। अब इसमें राहत मिल गई है।