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Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बजट में आरडीजी का 13% तक रहा योगदान, विकास योजनाओं पर होगा असर

Mon, 09 Feb 2026 09:38 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश के बजट का 13 फीसदी हिस्सा आरडीजी का रहा है। ऐसे में आरडीजी बंद होने से बहुत सी योजनाओं के लिए सरकार बजट नहीं दे पाएगी। जानें विस्तार से...
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शिमला में राजस्व घाटा अनुदान पर प्रस्तुति देते वित्त सचिव। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के बजट को तैयार करने का सबसे बड़ा दारोमदार राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का रहा है। हिमाचल देश का ऐसा दूसरा राज्य है, जो नगालैंड के बाद बजट बनाने के लिए आरडीजी पर निर्भर है। हिमाचल के बजट का 13 फीसदी हिस्सा आरडीजी का रहा है। अन्य 15 राज्यों के बजट में बहुत कम हिस्सा आरडीजी का रहता है। इन राज्यों के पास आय के अन्य साधन हैं। प्रधान सचिव देवेश कुमार ने अपनी प्रस्तुति में इस पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बहुत सी योजनाओं के लिए सरकार बजट नहीं दे पाएगी।
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रविवार को अपनी प्रस्तुति के दौरान देवेश कुमार ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 275 (1) उन राज्यों को अनुदान प्रदान करने का प्रावधान करता है, जो अपनी राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच की खाई को पाटने में सक्षम नहीं हैं। इस अनुच्छेद के अनुसार राजस्व घाटा अनुदान दिया जाता है। वित्त आयोग के समक्ष बार-बार प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री खुद कई दफा नई दिल्ली गए और बार-बार केंद्रीय वित्त मंत्री व वित्तायोग से मिले। राज्य की भौगोलिकता ऐसी है कि हिमाचल प्रदेश में विभिन्न सुविधाएं देने के लिए कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होना जरूरी है और कर्मचारियों के ज्यादा होने पर यहां पर उन पर खर्च ज्यादा आता है। 

देवेश ने कहा कि राज्य में वनों को दृष्टिगत रखकर मदद मांगी गई। पहली बार इस मद में खुले वन के लिए थोड़ा-बहुत आवंटन हुआ है। भूस्खलन पहले केंद्र से मिलने वाली आपदा राहत में शामिल नहीं था। इसे शामिल किया गया है।

केंद्रीय करों में .084% बढ़ी हिस्सेदारी
प्रधान सचिव ने कहा कि केंद्रीय करों में मामूली सी बढ़ोतरी की गई है, जो महज .084 प्रतिशत है। 15वें वित्त आयोग ने 37,199 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान दिया। कोविड वर्ष में 11,431 करोड़ रुपये की अलग से भी अंतरिम राहत मिली। आरडीजी शुरू से ही मिलती रही है, जबसे प्रदेश बना है, तभी से दी जा रही है। चाहे यह कम हो या ज्यादा, सभी वित्त आयोगों ने हिमाचल के लिए आरडीजी की संस्तुति की। हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा को ढांचागत समस्या माना गया। चाहे कम ग्रांट मिली हो या न मिली हो। उन्होंने कहा कि केवल इसी वित्त आयोग ने इसे बंद किया है।

15वें वित्त आयोग ने की थी इस तरह से गणना 
देवेश कुमार ने कहा कि 15वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में वर्ष वार राजस्व और व्यय का आकलन किया था। हिमाचल प्रदेश के लिए 2021-26 अवधि में राज्य का राजस्व 90,760 करोड़ तथा व्यय 1,70,930 करोड़ आंका गया था। 80,170 करोड़ के घाटे की पूर्ति के लिए 35,064 करोड़ कर-हस्तांतरण और 37,199 करोड़ राजस्व घाटा अनुदान, 9,714 करोड़ अन्य अनुदानों के रूप में देने का आकलन किया। 4,407 करोड़ रुपये अन्य अनुदान के रूप में स्वीकार नहीं किए गए थे। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में इस प्रकार का कोई भी आकलन या गणना उपलब्ध नहीं है।

किस राज्य के बजट में आरडीजी का कितना हिस्सा 
नगालैंड 17.21, हिमाचल प्रदेश 12.71, त्रिपुरा 12.27, मिजोरम 8.70, मणिपुर 6.53, उत्तराखंड 5.56, केरल 2.41, पंजाब 2.20, मेघालय 2.09, पश्चिम बंगाल 2.06, आंध्र प्रदेश 1.89, सिक्किम 1.56, असम 1.47, राजस्थान 0.55, तमिलनाडु 0.09, कर्नाटक 0.08 और हरियाणा में 0.01 

कब कितना मिला पैसा
 
वित्तायोग अवधि राशि
6वां 1974-75 से 1978-79 161
7वां 1979-89 से 1983-84 207
8वां 1984-85 से 1989-89 223
9वां 1989-90 से 1993-94 523
10वां 1995-96 से 1990-2000 772
11वां 2000-01 से 2004-05 1979
12वां 2005-06 से 2009-10 10202
13वां 2010-11 से 2014-15 7889
14वां 2015-16 से 2019-20 40624
15वां 2020-21 अंतरिम 11431
15वां 2021-22 से 2025-26 37199
16वां 2026-27 से 2030-31 00000

आने वाली सरकारों पर भी बुरा असर डालेगा आरडीजी बंद करना
प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने कहा कि आरडीजी को बंद करना आने वाली सरकारों पर भी बुरा असर डालेगा। वित्तीय 2026-27 के लिए विकास के कार्यों, बकाया देनदारियों, राज्य योजनाओं आदि को छोड़कर लगभग 6000 करोड़ रुपये का एक साफ और बड़ा रिसोर्स गैप पड़ा है। अगर राजस्व बढ़ाने और खर्च कम करने के यह उपाय और सुधार किए भी जाते हैं, तो भी रिसोर्स गैप बना रहेगा और आरडीजी इस मामले में मददगार रहा है।

प्रधान सचिव के अनुसार हिमाचल प्रदेश का गठन जनता की आकांक्षाओं पर हुआ था, न कि आर्थिक रूप से फायदेमंद यूनिट के तौर पर किया गया था। इन सिफारिशों का असर सिर्फ मौजूदा सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली सरकारों पर भी बुरा असर डालेगा। यह हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ घोर अन्याय है

शराब और सीमेंट पर सेस लगाने की भी एक सीमा
हिमाचल में टैक्स लगाने के लिए शराब और सीमेंट जैसी वस्तुओं पर सेस लगाए जा रहे हैं, मगर इनकी भी एक सीमा है। अगर ज्यादा कर लगाएंगे तो फिर बाहरी राज्यों से शराब और सीमेंट मंगवाया जाता है। भू राजस्व पर सेस लगाकर राजस्व जुटाने की एक उम्मीद है।

सचिवालय में प्रस्तुति के बाद ओकओवर में फिर हुई चर्चा
हिमाचल की वित्तीय स्थिति को लेकर सचिवालय में रविवार को प्रधान सचिव वित्त की ओर से दी गई प्रस्तुति के बाद शाम को ओक ओवर में आरडीजी पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सुक्खू सहित मंत्री, विधायक और अधिकारी इस अवसर पर मौजूद रहें। हिमाचल की वित्तीय स्थिति को लेकर कइयों ने अपनी राय भी दी।
स्क्रीन पर पीपीटी न चलने पर तल्ख हुए सीेएम स्क्रीन पर पीपीटी न चलने पर मुख्यमंत्री सुक्खू तल्ख हो गई। न्यू आर्म्सडेल भवन में जब प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने पीपीटी शुरू की तो स्क्रीन न चलने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या इसे पहले चेक नहीं किया जाता है। सीएम ने कहा कि आईटी में इसके इंचार्ज कौन हैं। ये कौन सी तकनीक लगाई गई है, जिससे स्क्रीन नहीं चल रही।  

वित्त विभाग से केवल सुझाव लिए, अंतिम फैसला कैबिनेट का होगा
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की ओर से लिया जाएगा।

उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वासन दिया कि लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा। सरकार ने आम आदमी पर बोझ डाले बिना संसाधनों के सृजन की दिशा में नीतियां लागू की हैं। राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष वन क्षेत्र का मामला उठाया, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया है। इसके अतिरिक्त भूस्खलन से होने वाली आपदाओं के लिए भी धन आवंटन पर सहमति बनी है।

वित्त विभाग से केवल सुझाव लिए, अंतिम फैसला कैबिनेट का होगा
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए हैं। इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की ओर से लिया जाएगा।
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आरडीजी नहीं देने की संस्तुति के ये कारण बताए
राज्य सचिवालय में प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने स्पष्ट किया कि किन कारणों को बताकर 16वें वित्त आयोग ने आरडीजी नहीं देने की संस्तुति की है। आयोग ने राजस्व घाटा घटने की बात कर आरडीजी बंद कर दी। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राजस्व घाटा 2020-21 में जीडीपी के 7.8 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 6.9 प्रतिशत आ गया, जो जीडीपी का लगभग 0.3 प्रतिशत घट गया है। प्रतिबद्ध व्यय  में भी कमी आई है।
 
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