केंद्रीय बजट में राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और गड़बड़ा गई है। राज्य सरकार कर्मचारियों व पेंशनरों को नए वेतनमान का एरियर देने की स्थिति में नहीं है। महंगाई भत्ता फ्रीज करने व सभी सब्सिडी बंद करने की नौबत आ गई है। प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार की ओर से रविवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल, कांग्रेस विधायकों, अधिकारियों और मीडिया के समक्ष दी प्रस्तुति में यह खुलासा हुआ है।
प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए वित्त विभाग ने ओल्ड पेंशन स्कीम बंद कर दोबारा एनपीएस या यूपीएस अपनाने और पद खत्म कर नई भर्ती न करने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि सभी सब्सिडी बंद करनी होंगी। चिंता जताई कि आरडीजी बंद होने से आर्थिक प्रबंधन मुश्किल होगा। राज्य बड़ी विपत्ति में जाने वाला है। सरकार कर्मियों के लिए अगले वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की स्थिति में नहीं होगी। हिमकेयर और सहारा योजनाओं की 400 करोड़ की देनदारी देना मुश्किल है। मुफ्त बिजली बंद करने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने जैसे उपाय करने पड़ेंगे। बोर्डों और निगमों की ग्रांट रोक कर इन्हें मर्ज करने के साथ मौजूदा कर्मियों का युक्तिकरण करना होगा।
रविवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सचिवालय में प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने आरडीजी बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले असर को पीपीटी से पेश किया। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट के 13 फीसदी भाग में आरडीजी का योगदान रहा है। 16वें वित्तायोग ने आरडीजी को शून्य करते समय यह नहीं सोचा कि अगले पांच साल काम कैसे चलेगा। जीएसटी आने से राज्य का बहुत नुकसान हुआ है। राज्य का 48,000 करोड़ रुपये का प्रतिबद्ध खर्च है, जो करना ही है।
अपना राजस्व ले-देकर 18 हजार करोड़ रुपये का है। केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 14 हजार करोड़ रुपये ही मिलेंगे। कर्ज 10 हजार करोड़ ही ले पाएंगे। यानी 42 हजार करोड़ का ही प्रबंध हो पाएगा। अगले वित्त वर्ष में 13 हजार करोड़ ब्याज और मूलधन में खर्च होगा। यानी कर्ज व इसका ब्याज चुकाने के लिए ही 3,000 करोड़ रुपये सरकार को खुद जोड़ने पड़ेंगे। कई योजनाओं के लिए उपदान देय हंै। विकास और पूंजीगत व्यय के लिए सरकार के पास बजट नहीं बचेगा।
कर्मियों-पेंशनरों का 8,500 करोड़ एरियर देने को है। डीए और इसके एरियर की अदायगी भी करनी है। मंडी मध्यस्थता योजना के लिए फंडिंग पर विचार करना होगा। कोर्ट के आदेशों पर भी 1,000 करोड़ का भुगतान देय होगा। राशन के लिए केंद्र की ओर से बीपीएल और अन्यों के लिए ग्रांट आती है। सरकार के बजट पर विचार करना होगा। वास्तविक पात्र चिह्नित कर सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर किया जाने वाला खर्च घटाना होगा। बोर्डों-निगमों व विश्वविद्यालयों में भी इन्हीं नियमों को लागू करने को कहा। एचआरटीसी की उपदान योजनाओं बंद करना होगी।
विकास कार्य छोड़ने के बाद भी 6,000 करोड़ का गैप
प्रधान सचिव वित्त ने कहा कि अगर अगले बजट की बात करें तो तमाम विकास कार्यों को छोड़ने के बाद भी आय और व्यय में 6,000 करोड़ रुपये का गैप पड़ेगा। जब सारी सब्सिडी, सब पूंजीगत व्यय जीरो किया जाए तो उसके बावजूद अगले वित्त वर्ष में प्रदेश की सभी प्राप्तियां 52,000 करोड़ रुपये की होंगी। प्रतिबद्ध खर्च करीब 56 से 57 हजार करोड़ रुपये होगा। यानी चार हजार करोड़ रुपये का होगा। दो हजार करोड़ अन्य व्यय मिलाकर यह अगले वित्तीय वर्ष में होने वाला है। चालू वित्त वर्ष का बजट 58,514 करोड़ रुपये का है।
यह अधिकारों की लड़ाई, आम लोगों पर पड़ेगा असर : सीएम
सीएम सुक्खू ने कहा कि चार बार केंद्रीय वित्त मंत्री व चार बार वित्तायोग के अध्यक्ष से मिला, फिर भी आरडीजी बंद कर दिया। 17 राज्यों में से नगालैंड के बाद हिमाचल पर ही ज्यादा असर पड़ रहा है। यह सरकार का ही मामला नहीं है। इसका सूबे के लोगों पर भी बुरा प्रभाव पड़ने वाला है। यह लोगों के अधिकारों की लड़ाई है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजनीतिक लड़ाई है। इसे कानूनी तौर पर भी लड़ना चाहिए, क्योंकि आरडीजी सांविधानिक अधिकार है। ठीक है हम आरडीजी नहीं मांगते, पर हमारे पानी पर बनी बिजली परियोजनाएं वापस कर दो। अगर पंजाब फूड बाॅउल ऑफ इंडिया है तो हिमाचल वाटर बाॅउल ऑफ इंडिया है।
सिफारिश... राज्य की परिसंपत्तियां सेल करें या लीज पर दें
प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य की परिसंपत्तियों को पैसा कमाने योग्य करना होगा। इन्हें या तो सेल करें या लीज पर दें। पीपीपी की संभावनाएं तलाशेंगे। इसके अलावा खाद्य सब्सिडी समाप्त करनी होगी, बीपीएल परिवारों के लिए पहले से ही केंद्रीय प्रायोजित योजना है। बिजली सब्सिडी समाप्त करने से 1,200 करोड़ की बचत होगी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 1,661 करोड़ की सालाना जरूरत है। 500 करोड़ तक खर्च लाएंगे। डीबीटी योजनाओं एवं पेंशनरों में फर्जी एवं डुप्लीकेट लाभार्थी प्रविष्टियां हटानी होंगी। इससे 1,800 करोड़ का अतिरिक्त उधार लेने की संभावना बनेेगी। कर प्रयासों में सुधार करेंगे। विभिन्न उपकर से 300 करोड़ का राजस्व मिलेगा।
विकास योजनाओं पर पड़ेगा असर
हिमाचल प्रदेश के बजट को तैयार करने का सबसे बड़ा दारोमदार राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का रहा है। हिमाचल देश का ऐसा दूसरा राज्य है, जो नगालैंड के बाद बजट बनाने के लिए आरडीजी पर निर्भर है। हिमाचल के बजट का 13 फीसदी हिस्सा आरडीजी का रहा है।