इस रक्षाबंधन बहनें भाइयों की कलाइयों पर बांस से बनीं ईको फ्रेंडली राखियां बांधेंगी। ऊना जिले में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने बांस से बनीं राखियां तैयार की हैं और इन्हें बाजार में उतार दिया है। बाजार में इन राखियों की काफी मांग की जा रही है। राखी की कीमत 25 रुपये से शुरू है। स्वयं सहायता समूहों की ओर से प्रशासन की मदद से इन राखियों को तैयार कर बेचा जा रहा है।
ग्रामीण विकास विभाग और प्रशासन के सहयोग से स्वयं सहायता समूह सोमभद्र ब्रांड के जरिये घरेलू उत्पाद तैयार कर रहे हैं। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की ओर से बांस से बनाई राखियां इस बार आकर्षण का केंद्र बनी हैं। लोगों की तरफ से रक्षा बंधन पर रेशम, प्लास्टिक, चांदी से बनी राखियों का अधिक प्रयोग किया जाता है। इसी तर्ज पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बांस की लकड़ी का प्रयोग करते हुए अलग-अलग डिजाइन की राखियां तैयार की हैं।
ऊना में सोमभद्र उत्पाद प्रदर्शनी में इन राखियों को बिक्री के लिए रखा गया है। मेले में पहुंचने वाले लोग राखियों को खूब पसंद कर रहे हैं। जिले में बांस के उत्पादों को तैयार करने के लिए प्रशासन और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर स्वयं सहायता समूहों का सहयोग कर रहे हैं। डिसा परियोजना अधिकारी ग्रामीण विकास विभाग संजीव ठाकुर ने कहा कि इस बार स्वयं सहायता समूहों ने रक्षा बंधन के मद्देनजर बांस से बनी राखियां तैयार की हैं। लोग इन राखियों के प्रति अपनी काफी रुचि दिखा रहे हैं।
राखियों की खासियत
खास यह है कि यह राखियां पूरी तरह ईको फ्रेंडली हैं। यह पर्यावरण के लिए भी हानिकारक नहीं होंगी। इन्हीं खासियतों को देखते हुए लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा डिजाइन भी काफी आकर्षक बनाए गए हैं। जो काफी पसंद किए जा रहे हैं।