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इंदु का लगातार कद बढ़ने से सियासी गलियारों में नए समीकरण की चर्चा

Wed, 23 Jun 2021 01:23 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला

सार

राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली हाईकमान की ओर से इंदु गोस्वामी को लगातार दी जा रही पदोन्नति को सोची-समझी सियासत के रूप में देख रहे हैं। 
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राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल में वर्ष 1998 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम की सदस्य रह चुकीं राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी 2017 के विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद सियासी ध्रुव के रूप में चमकने लगी हैं। 2022 के विस चुनाव से पहले दिल्ली हाईकमान इंदु गोस्वामी को लगातार पदोन्नति दे रहा है। वर्ष 2017 में इंदु को प्रदेश महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। 2020 में राज्यसभा सांसद और अब विधानसभा चुनाव से डेढ़ साल पहले भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में पदोन्नति दी गई।

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राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली हाईकमान की ओर से इंदु गोस्वामी को लगातार दी जा रही पदोन्नति को सोची-समझी सियासत के रूप में देख रहे हैं। दरअसल, हिमाचल में भाजपा में लंबे अरसे से कद्दावर महिला नेता का सूखा पड़ा हुआ है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद पर भी किसी महिला को जिम्मेदारी नहीं मिली। मुख्यमंत्री की कुर्सी भी पुरुष नेताओं के पास ही रही। दिल्ली की सियासत में भी हिमाचल से कोई कद्दावर महिला नेता बड़े पद के लिए नहीं उभरी। कुछ समय से हिमाचल सरकार को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा है।

दिल्ली में बैठे हिमाचल के नेताओं को लेकर भी कई चर्चाएं चली रहती हैं। राजनीतिक विश्लेषक इंदु गोस्वामी की पदोन्नति को कुछ इन्हीं सियासी बिंदुओं से जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे में यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इंदु गोस्वामी का लगातार कद बढ़ाना हिमाचल की सियासत में नए समीकरण भी पैदा कर सकता है। वर्तमान में दिल्ली की सांगठनिक सियासत में हिमाचल से केवल जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर को ही बड़ी जिम्मेदारी मिली थी। अब तीसरा नाम इंदु गोस्वामी का जुड़ गया है। 
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मुख्यमंत्री पद की रेस में आने के बाद शुरू हुआ था विरोध
इंदु वर्ष 2017 में राजनीतिक रूप से उस वक्त चर्चा में आई थीं, जब हाईकमान ने दिल्ली से उनको पालमपुर हलके से टिकट दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके लिए पालमपुर आकर प्रचार किया था। उस वक्त इंदु गोस्वामी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा का विषय बना था। लेकिन, अपनी ही पार्टी के बीच भारी अंतर्विरोध के चलते इंदु विस चुनाव हार गई थीं।

पालमपुर में सियासी हस्तक्षेप से परेशान रहीं इंदु
2017 में हार के बाद इंदु पालमपुर में कई नेताओं के राजनीतिक हस्तक्षेप से लगातार परेशान रहीं। उन्होंने प्रदेश संगठन के समक्ष दोनों नेताओं की ओर से हस्तक्षेप का मुद्दा कई बार उठाया। महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दिया। पालमपुर भाजपा मंडल ने दो बार इंदु के खिलाफ प्रदेश नेतृत्व और दिल्ली हाईकमान में शिकायत की थी।

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