हिमाचल में प्रस्तावित रेल परियोजनाएं फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाई हैं। सूबे से जुड़े न सामरिक महत्त्व के प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे हैं और न ही औद्योगिक महत्त्व के। मनाली-लेह रेल लाइन अभी हवा में ही है। चंडीगढ़ बद्दी रेल लाइन का भी काम शुरू नहीं हो सका है।
सालों से लटकी बिलासपुर-भानुपल्ली रेललाइन भी अभी तक भूमि अधिग्रहण के पेच में फंसी है। भले ही रेल बजट में हर बार हिमाचल को विभिन्न लाइनों के नाम पर सर्वे का झुनझुना थमा दिया जाता है, लेकिन जमीन पर बजट की घोषणाएं कहीं नहीं दिख रही हैं।
2015-16 में मिला करोड़ों का बजट पर नहीं हुआ काम- वित्त वर्ष 2015-16 में 26 फरवरी को केंद्रीय रेल मंत्री की ओर से पेश किए गए रेल बजट में भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन के लिए 160 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। नंगल-तलवाड़ा रेललाइन को 100 करोड़ का बजट घोषित किया गया।
चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन को 95 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा हुई। ऊना-हमीरपुर रेललाइन का सर्वेक्षण एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य भी तय किया गया। इसी तरह से ऊना-अंब के बीच 25 किलोमीटर लंबी रेललाइन को भी मंजूरी दी गई।
प्रदेश की तीन रेल लाइनों के लिए पहली बार 355 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इतने बड़े बजट का पहली बार प्रावधान किया गया, मगर इस बजट व्यवस्था के बावजूद अभी इनका काम बहुत सुस्ती से हो रहा है।