लोकसभा में 26 फरवरी को जब केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेल बजट पेश करेंगे, उस समय हिमाचल प्रदेश की जनता की निगाहें बजट पर टिकी रहेंगी।
पिछले दस साल से केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार के रेल बजट को रो-रोकर कोसने वाली भाजपा के सामने चुनौती होगी। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार से लेकर प्रदेश के तमाम भाजपा नेताओं के लिए 2015-16 का रेल बजट परीक्षा की घड़ी होगी।
जनता यह देखना चाहेगी कि केंद्र सरकार में इनकी पकड़ कितनी मजबूत है। ये दिग्गज नेता प्रदेश की आधा दर्जन से अधिक योजनाओं में से कितनी देश के रेल बजट में शामिल करा पा रहे हैं या फिर इनकी शक्ति केवल बयानबाजी तक सीमित है।
ऐसा इसलिए भी कि प्रदेश की जनता से प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर भारी बहुमत से जीताकर संसद में भेजा है।
10 साल से ये मांग रहा हिमाचल प्रदेश
-चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन
-भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन
-नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन
-मनाली-लेह रेलवे लाइन
-कालका-परवाणू बड़ी रेल लाइन (ब्राड गेज लाइन, ट्रेन)
-घनौली-बद्दी-कालाअंब, पांवटा साहिब-देहरादून (नैरोगेज लाइन)
-बिलासपुर से मंडी के बीच (नैरोगेज लाइन)
-पठानकोट और जोगिंद्रनगर के बीच (ब्राडगेज रेललाइन)
-ऊना से हमीरपुर के बीच नई रेल लाइन
-प्रदेश के लिए नई ट्रेन
हर बार हिमाचल का रेल मैप हाशिए पर
देश की आजादी के बाद से लेकर आज तक हिमाचल में रेलवे विस्तार का रेल मैप हाशिए पर रहा है। इस पहाड़ी प्रदेश में रेलवे को विस्तार देने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।
यही कारण रहा कि कालका से परवाणू के बीच 15 किलोमीटर की बड़ी लाइन आज तक नहीं बन पाई। तमाम योजनाएं महज घोषणाओं तक सीमित है। धरातल पर न के बराबर काम हुआ है।
यह तस्वीर तब है जबकि यह राज्य देश के पर्यटन राज्यों में शुमार है। आज भी औसतन एक करोड़ से अधिक पर्यटक सालाना आते हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि हिमाचल भाजपा की ओर से प्रदेश में अधिक से अधिक रेल योजनाएं लाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया गया है।
प्रदेश के चारों सांसदों ने रेल मंत्री से मिलकर लिखित और मौखिक रूप से अपनी बात प्रमुखता से रखी है। उम्मीद है कि हिमाचल को कुछ अच्छा ही मिलेगा