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अभिनेता राजकुमार का ये सच जानते हैं आप

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संजीदा अभिनय और डायलॉग से करीब चार दशक तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले अभिनेता राज कुमार मनाली में बिना विग घूमा करते थे। लोग यह तो जानते हैं कि उनके बाल नहीं थे और वे हमेशा विग लगाते थे। लेकिन, मनाली में बिना विग घूमने के पीछे भी रोचक किस्सा है।
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बताते हैं कि एक बार राजकुमार छुट्टियां बिताने मनाली आए। वे यहां घूमना चाह रहे थे। प्रशंसकों से बचने के लिए विग उतार कर वह घूमने निकल गए। बाहर उन्हें किसी ने नहीं पहचाना। इसके बाद मनाली आने पर हर बार वे यहां बिना विग ही घूमते थे।

‘मर्यादा’ फिल्म की शूटिंग की थी यहां

पहाड़ों में सुकून के पल बिताने के लिए उन्होंने ‘मर्यादा’ फिल्म की शूटिंग के दौरान मनाली के प्रसिद्ध हिडिंबा मंदिर के समीप लॉग हट में जमीन खरीदी और आशियाना बना लिया। वे कहते थे कि यहां की हवा में अजी बस खुशबू है जो मुझे यहां रुकने के लिए मजबूर करती है।

गर्मियों में अकसर यहां आने वाले राजकुमार की अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु पर उनका अंतिम संस्कार यहीं किया जाए। 3 जुलाई 1996 को उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली और उनका अंतिम संस्कार भी वहीं हुआ। लेकिन बाद में उनके बेटे पुरु राजकुमार उनकी राख को मनाली लाए और उसे यहां समाधि का रूप दे दिया।

राजकुमार के कहने पर खोला स्कूल

साहित्यकार सैनी अशेष का कहना है कि उनकी समाधि आज सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। शूटिंग को पहुंचे अमिताभ बच्चन, रितिक रोशन और शाहरुख खान के अलावा कई हस्तियां इस समाधि में शीश नवा चुकी हैं। कृष और वीरजारा फिल्म की शूटिंग में कोआर्डिनेटर रहे अनिल कायस्था का कहना है कि राजकुमार का परिवार अब भी मनाली में आता है। घर के रख-रखाव के लिए उन्होंने केयर टेकर रखा है।

उन दिनों मनाली में कोई अच्छा स्कूल नहीं था। बच्चों से लगाव के चलते राज कुमार ने उनके दोस्त स्थानीय निवासी नरांतक को यहां स्कूल खोलने की सलाह दी। शशांक स्कूल के संचालक नरांतक का कहना है कि उनके कहने पर ही यहां स्कूल खोला गया। वादे के मुताबिक स्कूल के उद्घाटन के लिए वे खुद तो आए ही साथ ही रामानंद सागर को भी लाए।
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ऐसे फिल्मों में आए राज कुमार

राज कुमार का जन्म पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान में आठ अक्तूबर 1926 को एक मध्यम वर्गीय कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। स्नातक के बाद राजकुमार मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में बतौर सब इंस्पेक्टर तैनात थे। यहां फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का आना-जाना लगा रहता था।

एक बार पुलिस स्टेशन में फिल्म निर्माता की नजर राज कुमार पर पड़ी। वे उनके बातचीत करने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने ही राजकुमार को फिल्मों की ओर प्रेरित किया। इसके बाद राजकुमार ने पुलिस की नौकरी छोड़ फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया और खूब शौहरत पाई।
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