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प्रियंका गांधी मामले में एसपीजी की भूमिका पर उठे सवाल

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हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग ने प्रियंका गांधी वाड्रा की जमीन के मामले में एसपीजी निदेशक पर तीखी टिप्पणी की है। आयोग ने एसपीजी निदेशक के पत्र को अनधिकृत करार दिया है। आयोग ने कहा है कि एसपीजी व्यक्ति को सुरक्षा देता है न कि उसकी संपत्ति को।
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हिमाचल के मुख्य सूचना आयुक्त भीम सेन और सूचना आयुक्त केडी बातिश की डबल बेंच ने ये तल्ख टिप्पणी अपने लिखित आदेश में की है। आयोग ने कहा है कि एसपीजी निदेशक की ऐसे किसी पत्र को निजी व्यक्तियों को भेजने की कोई अथॉरिटी नहीं है। इलेक्शन लॉ के अनुसार भी एसपीजी प्रोटेक्टी सहित तमाम उम्मीदवारों को विस्तृत संपत्ति के साथ अपनी चल और अचल संपत्ति घोषित करनी होती है।

प्रियंका ने पत्र का लिया था सहारा

एसपीजी निदेशक के लिखे पत्र को आधार बनाकर ही प्रियंका ने यह कहा था कि अगर शिमला के छराबड़ा में उनकी जमीन की सूचना को आरटीआई में दिया जाता है तो इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर एक आरटीआई कार्यकर्ता ने यह वांछित सूचना न मिलने पर आयोग के समक्ष अपील की थी।

वहीं, भारत के प्रधानमंत्री सहित किसी भी एसपीजी प्रोटेक्टी की ऐसी किसी दलील को आज तक चुनाव आयोग ने जायज नहीं ठहराया है, जिसमें यह कहा गया हो कि उनकी अचल संपत्ति को बताने से उनके जीवन को खतरा हो सकता है।
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डीसी शिमला को लगाई फटकार

आयोग ने कहा कि प्रथम अपीलेट अथॉरिटी यानी डीसी शिमला ने भी वांछित सूचना न दिलाने के लिए ऐसा तर्क दिया है, जो बिलकुल सही नहीं है। प्रथम अपीलेट अथॉरिटी ने एसपीजी निदेशक के कथित और गैर सत्यापित पत्र को अनड्यू वेटेज दी है।

एसपीजी एक्ट 1988 के तहत एसपीजी ग्रुप का कोई भी सदस्य भारत सरकार या किसी अन्य अधिकृत अथॉरिटी की पूर्व में ली गई लिखित अनुमति के बगैर किसी भी पत्र को कम्युनिकेट नहीं कर सकता, अगर यह निर्धारित प्रारूप में न हो।
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