सीडीपीओ की रिपोर्ट में सभी केंद्रों के राशन में नहीं निकली खराबी, अब खराबी मिली तो वापस होगा पूरा राशन
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जिले के 11 सीडीपीओ ने जांचा केंद्र में राशन दीक्षा सरोय
शिमला। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को आपूर्ति किए जा रहे राशन में किसी तरह की खराबी नहीं पाई गई है। बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने राशन में खराबी पाए जाने के शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में अगर राशन में किसी तरह की खराबी पाई जाती है तो राशन का पूरा लॉट बदला जाएगा। दरअसल बीते बुधवार को भट्ठाकुफर क्षेत्र के एक आंगनबाड़ी केंद्र में वितरित राशन में कीड़े मिलने का मामला सामने आया था। इसे अमर उजाला ने 11 सितंबर के संस्करण में छापा था। इसमें एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उन्हें केंद्र से माह, चना और दलिया दिया गया जिसमें दलिया में काले रंग के कीड़े मिले। उन्होंने मौके पर इसका वीडियो भी बनाया था। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी को व्यक्ति ने इस मामले की फोन पर शिकायत की थी। इसके बाद अधिकारी ने संबंधित केंद्र के सीडीपीओ सहित सभी ग्यारह सीडीपीओ को राशन की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। मशोबरा ब्लॉक के अधीन आने वाले इस आंगनबाड़ी केंद्र सीडीपीओ रूपा रानी ने बताया कि उन्हें इसकी शिकायत फोन पर मिली थी। इसके बाद तुरंत सुपरवाइजर को मौके पर भेजा और अगले दिन वह खुद भी मौके पर गईं लेकिन राशन में कोई खराबी नहीं निकली।
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संवाद
बॉक्स 1 सभी केंद्रों से मिल चुकी है रिपोर्ट : ममता
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल ने बताया कि उन्हें इस मामले की सूचना व्यक्ति ने फोन पर दी थी। इसके बाद तुरंत संबंधित सीडीपीओ को जांच के निर्देश दिए थे। इसके अलावा जिले के अन्य सीडीपीओ से भी राशन की रिपोर्ट मांगी थी। इसमें सभी केंद्रों से अच्छा राशन पहुंचने की रिपोर्ट मिली है। भविष्य में भी सुनिश्चित किया जाएगा कि माता और शिशु को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता अच्छी हो।
जिले में हैं 2154 आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में इस समय 2154 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 27,259 को पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत राशन दिया जाता है। इसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 की धारा 4, 5 और 6 के अनुसार खाद्य केंद्र से 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण सहायता दी जाती है। इसमें आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म पका हुआ भोजन और घर ले जाने वाला राशन दिया जाता है। 14 से 18 साल की किशोरियां भी इसके तहत लाभ प्राप्त कर रही हैं।