दक्षिण एशिया के ग्रास लैंड और नदियों के तट पर पाया जाना वाला दुर्लभ प्रजाति का इंडियन पाइथन ऊना जिला के स्वां नदी की तलहटी में पल बढ़ रहा है। दिलचस्प यह है कि पाइथन मॉलरूस प्रजाति का परिवार यहां पूरी तरह से सुरक्षित है। झाड़ीनुमा तट और पानी की मौजूदगी वाला यह इलाका इंडियन पाइथन के लिए सुरक्षित माना जा रहा है।
ऊना के पेखुवेला से लगभग बीस फुट और एक क्विंटल वजनी अजगर की बरामदगी के बाद वन विभाग के लिए भी यह शोध का विषय बन गया है। विभाग अब यह पता लगाएगा कि इस प्रजाति के अजगरों की यहां कितनी संख्या है। विभाग के अभी तक के सर्वेक्षण के मुताबिक सोमभद्रा के नाम से विख्यात ऊना की स्वां नदी के तट पर इंडियन पाइथन की यह दुर्लभ प्रजाति कई सालों से पल रही है।
बताया जा रहा है कि इस प्रजाति के कई विशालकाय अजगर इलाके में हो सकते हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक विशेषज्ञों ने यह भी चिंता जताई है कि स्वां नदी के चैनेलाइजेशन वर्क के चलते इस प्रजाति के अजगर का अस्तित्व खतरे में है। चूंकि चैनेलाइजेशन से इनके प्राकृतिक रास्तों से छेड़छाड़ हो रही है। वहीं, मानवीय हस्तक्षेप के कारण भी पाइथन रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि यह विशालकाय पाइथन नदी के बेसिन से निकल कर खेतों तक आ गया।
स्वभाव से शांत है इंडियन पाइथन
बड़ी बात यह है कि मॉलुरस प्रजाति का यह पाइथन दुर्लभ प्रजाति की श्रेणी में है जिसे वन विभाग ने शेड्यूल-1 की श्रेणी में रखा है। यानी इसके शिकार या इसे किसी तरह का नुकसान पहुंचाना गैर जमानती अपराध है। डीएफओ ऊना आरके डोगरा ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह पाइथन शेड्यूल-1 में आता है। उन्होंने कहा कि विभाग सर्वेक्षण कर रहा है इस तरह के कई पाइथन इलाके में हो सकते हैं। इंडियन पाइथन मॉलुरस नामक यह अजगर दक्षिण एशिया में बहुत कम संख्या में बचा है। लिहाजा इसे दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है।
ऊना में बरामद हुआ इंडियन पाइथन स्वभाव से शांत है। इसके चलने की गति भी धीमी है और यह आम तौर पर इतना शांत है कि आक्रमण पर भी आदमी या अन्य शिकार पर अटैक नहीं करता। डीएफओ आरके डोगरा ने बताया कि ये पाइथन अच्छे तैराक होते हैं और अपने रिहायशी इलाके में रहना ही पसंद करते हैं। इसके मुख्य भोजन में नदी के किनारे आने वाले पक्षी, चूहे और कभी-कभी जानवर भी होते हैं। पेट भरकर भोजन के बाद ये दो साल तक भी भूखे रह सकते हैं। डीएफओ ने लोगों से आग्रह किया है कि अगर रिहायशी इलाके में पाइथन की मौजूदगी पाई जाती है तो वन विभाग को सूचित करें, दुर्लभ प्रजाति के जीवों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचाएं।
सुरक्षित स्थान पर छोड़ा अजगर
ऊना में बरामद विशालकाय अजगर को वन विभाग ने बुधवार को जिला के ही किसी ऐसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया, जहां इसकी प्रजाति पल-बढ़ रही है। डीएफओ आरके डोगरा ने बताया कि इसके लिए पहले चंडीगढ़ संपर्क किया गया। लेकिन विभागीय निर्देशों के अनुसार इसकी सुरक्षा को देखते हुए बस्ती से दूर अज्ञात इलाके में छोड़ दिया गया है।