कॉलेजों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के मकसद से सरकार ने पीटीए (पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन) के तहत भर्ती होने वाले शिक्षकों पर नई शर्तें लागू कर दी हैं। 18 जुलाई 2014 के बाद कॉलेजों में पीटीए के तहत रखे जाने वाले अस्थाई शिक्षकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) पास करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा प्रदेश लोकसभा आयोग की ओर से आयोजित स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) भी पीटीए के तहत लगने वाले शिक्षकों को पास करना होगा। इससे पहले पीटीए के तहत ये शर्तें नहीं थीं। शनिवार को अवर सचिव (उच्चतर) पुष्पा चौधरी की ओर से अधिसूचना जारी हुई है।
प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में वर्तमान में पीटीए के तहत करीब 400 शिक्षक कार्यरत हैं। वर्तमान में कॉलेजों में 300 से अधिक कॉलेज शिक्षकों के पद खाली हैं, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा अभियान के तहत कॉलेजों में 1500 शिक्षकों की आवश्यकता है।
विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सरकार की इस अधिसूचना के बाद भर्ती होने वाले शिक्षक पहले के मुकाबले अधिक शिक्षित होंगे। साथ ही पीटीए शिक्षकों की भर्ती में प्रिंसिपलों और राज नेताओं का हस्तक्षेप भी स्वत: कम हो जाएगा।
कॉलेजों में पीटीए के तहत पीटीए शिक्षक, स्टॉप गैप और पीरियड बेस के आधार पर शिक्षकों को रखने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 18 जुलाई को सरकार ने पीटीए पर नई भर्तियों से रोक हटा दी थी।
प्रधान सचिव शिक्षा अली रजा रिजवी ने पुष्टि करते हुए कहा कि नई भर्तियों पर ये शर्तें लागू होंगी। 18 जुलाई से पहले भर्ती शिक्षकों को न तो निकाला जाएगा और न ही उन पर नई शर्तें लागू होंगी।