हिमाचल प्रदेश में करीब 27 साल बाद एक बार फिर लॉटरी का कारोबार शुरू होने जा रहा है। सरकार दिसंबर से इसे शुरू करने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए वित्त विभाग ने टेंडर प्रक्रिया तेज कर दी है। कई नामी लॉटरी कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाते हुए आवेदन किए हैं। विभाग की योजना 15 नवंबर तक चयनित कंपनी को टेंडर आवंटित करने की हैे।
सरकार को इस नई व्यवस्था से सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में लॉटरी शुरू करने के लिए सरकार ने नियम अधिसूचित करने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद वित्त विभाग के अधीन लॉटरी निदेशालय के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर ई-टेंडर जारी किया था।
सरकार का उद्देश्य लॉटरी संचालन को व्यवस्थित, पारदर्शी और वित्तीय रूप से सुरक्षित बनाते हुए राजस्व के नए स्रोत तैयार करना है। अब टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों की भागीदारी बढ़ने के बाद विभाग की नजर चयन प्रक्रिया पूरी करने और तय समयसीमा के भीतर संचालन शुरू करने पर है। सरकार इस पूरी व्यवस्था को निर्धारित नियमों और वित्तीय शर्तों के तहत संचालित करना चाहती है। विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन ने बताया कि 15 नवंबर तक चयनित कंपनी को टेंडर आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है।
एक दिन में अधिकतम 12 ड्रॉ, साल में तीन बंपर लॉटरी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हिमाचल में ऑनलाइन लॉटरी के साथ पारंपरिक पेपर टिकट वाली लॉटरी भी संचालित की जाएगी। एक दिन में अधिकतम 12 ड्रॉ निकाले जा सकेंगे। हालांकि, सालभर में केवल तीन बंपर ड्रॉ निकालने का प्रावधान रखा गया है। राष्ट्रीय अवकाश के दिन लॉटरी का ड्रॉ नहीं होगा। प्रत्येक ड्रॉ का समय, पुरस्कार राशि, टिकटों की अधिकतम बिक्री और अन्य जरूरी विवरण निदेशक, लॉटरी की ओर से तय किए जाएंगे। टिकटों पर हिमाचल सरकार का लोगो, डिजिटल हस्ताक्षर, ड्रॉ की तारीख और समय तथा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दर्ज करना अनिवार्य होगा। इन प्रावधानों का उद्देश्य टिकटों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के साथ ही लॉटरी संचालन में पारदर्शिता बनाए रखना है।
साल 1999 में धूमल सरकार ने लगाई थी रोक
हिमाचल प्रदेश में सरकारी लॉटरी पर वर्ष 1999 में प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने पूरी तरह रोक लगा दी थी। इससे पहले वर्ष 1996 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सिंगल डिजिट लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था। वर्ष 1998 में जब प्रो. प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने, तो लॉटरी को बंद कर दिया गया था। तत्कालीन सरकार ने लॉटरी के सामाजिक और आर्थिक नुकसान को देखते हुए यह फैसला लिया था। अब आर्थिक संकट से जूझ रही प्रदेश सरकार ने कड़े नियमों के साथ लॉटरी दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। विपक्षी दल भाजपा की ओर से सरकार के इस फैसले का लगातार विरोध किया जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बीते दिनों कहा था कि लॉटरी व्यवस्था को लेकर अनावश्यक भ्रम न फैलाया जाए। लॉटरी पूरी तरह भाग्य पर आधारित खेल है और किसी भी नागरिक के लिए इसे खरीदना अनिवार्य नहीं है।