अमृता ने अस्पताल पहुंचकर रात इसके बाद लेबर रूम की सफाई भी की। एक सरकारी दस्तावेज न होने पर दो जिंदगियों को दांव पर लगाने की इस घटना ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठा दिया है। मामला प्रकाश में आने पर स्थानीय लोगों में अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष है।
उधर, बताया जा रहा है कि अस्पताल में लापरवाही का ऐसा पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।
पिछले साल भी अपने मायके नेरवा आई पालमपुर की महिला को पेट में तेज दर्द होने पर रात को परिजन अस्पताल पहुंचे थे तो रात को चिकित्सक नहीं पहुंचे थे। नर्स ने ही फर्स्ट एड दिया और ड्रिप लगाया था।
कार्यवाहक बीएमओ डॉ. अरविंद मेहरा ने बताया कि वह विभाग की मीटिंग के चलते शिमला गए हैं। दस बजे मोनिका की डिलीवरी करवाई। उनके मुताबिक अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वह 11 जून को नेरवा आएंगे, तभी मामले में कुछ बता पाएंगे।
लेबर पेन में अस्पताल आई पीड़िता को तत्काल उपचार दिया जाना चाहिए। महिला को उपचार क्यों नहीं दिया गया, इस बारे में अस्पताल में तैनात डॉक्टर और अन्य कर्मियों से जानकारी ली जाएगी। अगर इसमें गलती पाई जाती है तो जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएंगी।- डॉ. नीरज मित्तल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला