ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा है कि जिला लाहौल स्पीति के धार गंगछुमी में सौर ऊर्जा पार्क की स्थापना की जा रही है। इसके लिए भारत सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के अन्य भागों में भी सौर ऊर्जा पार्क स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे।
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इसके लिए सभी उपायुक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी जगहों को चिन्हित करें, जहां ये पार्क स्थापित किए जा सकते हैं। ऊर्जा मंत्री वीरवार को प्रदेश विधानसभा में गैर सरकारी सदस्य दिवस पर लाए गए संकल्प प्रस्ताव पर जवाब दे रहे थे। ये प्रस्ताव भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल ने लाया। उन्होंने सभी जिलों में सौर ऊर्जा पार्क स्थापित के लिए नीति बनाने को कहा। जवाब मिलने के बाद इसे वापस ले लिया गया।
वीरवार को इस पर ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि इस परियोजना के लिए 2525 हेक्टेयर सरकारी भूमि का चयन किया गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को इस परियोजना के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। राज्य में इस संयंत्र और अन्य सोलर संयंत्रों की स्थापना के लिए प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड और सोलर एनर्जी कारपोरेशन की एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी की स्थापना की है।
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भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से 25.25 लाख रुपये की धनराशि नई दिल्ली स्थित सोलर एनर्जी कारपोरेशन को डीपीआर बनाने के लिए दी जा चुकी है। इस संयंत्र से पैदा ऊर्जा को संचारित करने के लिए उपयुक्त ट्रांसमिशन व्यवस्था को स्थापित करना और ट्रांसमिशन लाइन की मेंटेनेंस करना बड़ा चुनौती है।
पांच मेगावाट क्षमता वाले सोलर पार्क खोले जाएंगे- ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि सौर गीजर पर भारत सरकार ने अनुदान समाप्त कर दिया है। इस अनुदान को फिर से शुरू करने के लिए विभिन्न स्तर पर भारत सरकार के साथ पत्राचार जारी है।
भारत सरकार से पांच मेगावाट तक की छोटी-छोटी क्षमता के सोलर पार्क की स्थापना के लिए आग्रह किया गया है। हिमाचल प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग की ओर से प्रदेश में आर्यभट्ट जियोइन्फोर्मेटिक्स एंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर और एनआइटी हमीरपुर की ओर से इस कार्य को फिजिबिलिटी देखने के लिए चयनित किया गया है।
सेटेलाइट भू बंदोबस्त को केंद्र से संपर्क करेगा हिमाचल
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर
- फोटो : फाइल फोटो
राज्य सरकार प्रदेश में भू बंदोबस्त की प्रक्रिया को पूरी तरह सेटेलाइट की मदद से कराने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी। केंद्र से मांग की जाएगी कि यदि केंद्र सरकार इस प्रक्रिया के लिए होने वाले खर्च को 90:10 के अनुपात में वहन करने को राजी होती है तो प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा।
राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने सरकाघाट से भाजपा विधायक इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में यह बात सदन में कही। माना कि प्रदेश के कई हिस्सों में चालीस साल से ज्यादा समय से भू बंदोबस्त नहीं हुआ है। लेकिन, कोशिश की जा रही है कि सभी जगह धीरे धीरे भू बंदोबस्त कर लिया जाए। इसके लिए जल्द ही 245 पटवारियों के पदों को भरकर उनसे सेवाएं ली जाएंगी।
भाजपा विधायक इंद्र सिंह ने जब उनसे प्रदेश भर में सेटेलाइट प्रणाली से भू बंदोबस्त के संदर्भ में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि यह बेहद महंगी प्रक्रिया है। हालांकि इस प्रक्रिया के तहत सटीक पैमाइश हो जाती है जिससे विवाद या गलती की गुंजाइश नहीं रहती। कहा कि वह केंद्र सरकार से इस संबंध में संपर्क करेंगे।
बताया कि फिलहाल प्रदेश में सेटेलाइट प्रणाली से बंदोबस्त के अंतर्गत सिरमौर जिले के पच्छाद तहसील के 47 में से 17 मुहालों में पैमाइश का काम पूरा हो चुका है। तहसील सुजानपुर के 16 में से 2 मुहाल व तहसील जोगिंद्रनगर के 15 में से 7 मुहालों की पैमाइश पूरी हो गई है। बाकी बचे मुहालों की पैमाइश पूरा होते ही इन मुहालों का अभिलेख बनाने का कार्य भी शुरू हो जाएगा।
8 जिलों में चल रहा है भू बंदोबस्त का काम- राजस्व मंत्री ने बताया कि प्रदेश के आठ जिलों में भू बंदोबस्त कार्य चल रहा है। इनमें भू व्यवस्था मंडल कांगड़ा के हमीरपुर, ऊना, मंडी व कुल्लू और भू व्यवस्था मंडल शिमला के शिमला, बिलासपुर, सिरमौर व सोलन जिलों के कुछ मुहालों में भू बंदोबस्त कार्य चल रहा है।
वन भूमि में अंत्येष्टि का मामला केंद्र से उठाएगी राज्य सरकार
वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी
- फोटो : अमर उजाला
राज्य सरकार वन भूमि में श्मशानघाटों और कब्रिस्तानों के इस्तेमाल को मंजूरी देने को लेकर केंद्र सरकार से मामला उठाएगी। वीरवार को वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कुल्लू से विधायक महेश्वर सिंह के सवाल पर यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे इलाके हैं जहां सालों से अंत्येष्टि या शव दफनाने की परंपरा चली आ रही है लेकिन केंद्र सरकार की ओर से फोरेस्ट कंजरवेशन एक्ट के तहत वन भूमि में सिर्फ तेरह विकास योजनाओं के लिए मंजूरी मिली हुई है।
उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि वह जल्द ही वन भूमि में अंत्येष्टि के मसले पर केंद्र सरकार से बात कर राज्य के लोगों के हित में कदम उठाएंगे। उन्होंने साफ किया कि जिन जगहों पर सैकड़ों साल से यह परंपरा चली आ रही है, वहां पर लोगों को नहीं रोका जा रहा। उधर, महेश्वर सिंह ने इन इलाकों में विकास के लिए जारी होने वाले पैसे रिलीज न होने की बात उठाई। कहा कि जब विकास निधि से कार्य कराने के लिए पैसा सेक्शन करने की बात आती है तो बीडीओ वन विभाग से एनओसी से मांग करते हैं।
इस पर मंत्री ने साफ किया कि फिलहाल केंद्र सरकार ने सिर्फ 13 तरह की स्कीमों के लिए ही मंजूरी दे रखी है। ऐसे में वह जल्द ही केंद्र सरकार से बात करेंगे ताकि एफसीआई के अंतर्गत एक हेक्टेयर भू्मि में विकास कार्य की मंजूरी के लिए डीएफओ स्तर से क्लीयरेंस मिलने में आसानी हो सके।
छह दिन में वन मंत्री करेंगे चंबा, कांगड़ा व मंडी जिलों का दौरा- प्रदेश के वन एवं मत्स्य मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी 20 से 26 मार्च के बीच चंबा, कांगड़ा व मंडी का दौरा करेंगे। विधान सभा अवकाश के दौरान वह विभिन्न विकासात्मक कार्यों का जायजा लेंगे। साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों में भाग भी लेंगे। इस दौरान स्थानीय जनता से भी मुलाकात कर उनकी शिकायतों पर भी जनसुनवाई करेंगे।
डीएफओ पब्लिसिटी अनीश शर्मा ने बताया कि 20 मार्च को वन मंत्री चंबा में 108 रोगी वाहन के पीड़ित के परिजनों को चम्बा जिलाधीश कार्यालय में अनुदान राशि देंगे व राख से धनारा, कुंडी से सुनारा तथा दुनाली से सदून मार्गों की बुनियाद का पत्थर रखेंगे। 21 मार्च को वह कन्या छात्रावास मेहला, कस्तूरबा गांधी कन्या पाठशाला मेहला, छतराडी में पी.एच.सी., गलोरा स्वास्थ्य केन्द्र में एक्सरे मशीन तथा भरमौर में कार पार्किंग का उद्घाटन करेंगे।
इसके अलावा 22 मार्च को गरिमा से खणी मार्ग के बुनियाद का पत्थर रखेंगे व जी.एम.आर. लाडा, जे.एस.डब्ल्यू. लाडा, लाकों लाडा व साडा की बैठकों की अध्यक्षता करेंगें। इसी तरह 23 मार्च को मैकलोडगंज के तासुगलक खाग मंदिर के शताब्दी समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। 25 मार्च को वन विभाग की गैंग हट चैल चौक (मंडी) का उद्घाटन करेंगे एवं चैल चौक में श्री सुरभि महायज्ञ में शामिल होंगे जबकि 26 मार्च को अलसू में मत्स्य फार्म के विस्तार एवं जल आपूर्ति का उद्घाटन करेंगें।