तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित भाजपा के विजय रथ को लोकसभा चुनाव में हिमाचल में रोकने का कांग्रेस को तोड़ निकालना होगा। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में लगातार आठ और कांगड़ा-शिमला संसदीय क्षेत्र में तीन चुनाव कांग्रेस हारती आ रही है। छह बार के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह भी पार्टी को इन संसदीय क्षेत्रों में जीत नहीं दिला सके। लंबे समय तक संगठन की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से पार्टी को वर्ष 2024 के चुनाव में करिश्मे की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज करने के बाद से भाजपा के हौसले बुलंद हैं। भाजपा अब पूरे दमखम से लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में है। हमीरपुर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर खुद को पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं। कांगड़ा, मंडी और शिमला में प्रत्याशियों को लेकर मंथन जारी है। उधर, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार से सबक लेते हुए कांग्रेस को आगामी छह माह में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए पूरी ताकत लगानी होगी।
हमीरपुर : वर्ष 1998, 1999 और 2004 में सुरेश चंदेल लगातार यहां से तीन बार सांसद चुने गए। 2007 में हुए उपचुनाव में प्रो. धूमल और 2008 में हुए उपचुनाव में अनुराग ठाकुर ने जीत दर्ज की। 2009, 2014 और 2019 में अनुराग ठाकुर ने जीत दर्ज की। वर्ष 1996 में हुए चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विक्रम सिंह चुनाव जीते थे। वर्ष 1989 और 1991 में भी भाजपा के प्रो. प्रेमकुमार धूमल ने इस सीट से जीते थे। 1980 और 1984 में कांग्रेस के नारायण चंद पराशर यहां से सांसद थे।
कांगड़ा : कांगड़ा संसदीय सीट पर पहले हर चुनाव में नतीजे बदलते थे। अब 2009 से कांग्रेस यहां हार रही है। 2009 में भाजपा के डॉ. राजन सुशांत सांसद चुने गए। 2014 में शांता कुमार ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। 2019 में किशन कपूर ने यहां भाजपा की जीत की हैट्रिक लगाई। इससे पहले 2004 में कांग्रेस के चंद्र कुमार, 1998 और 1999 में भाजपा के शांता कुमार, 1996 में कांग्रेस के सत महाजन, 1991 में भाजपा के डीडी कंदोरिया और 1989 में शांता कुमार कांगड़ा से सांसद चुने गए थे। 1980 और 1984 में कांग्रेस प्रत्याशी यहां से जीते थे।
शिमला : शिमला संसदीय सीट को कभी कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था। पार्टी ने 1980 से 1998 तक हुए छह चुनाव में यहां से लगातार जीत दर्ज की है। 2009 से कांग्रेस यहां जीत दर्ज करने के लिए तरस गई है।
मंडी : यहां भाजपा और कांग्रेस चुनाव-दर चुनाव एक-दूसरे पर भारी पड़े हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं वीरभद्र सिंह और पंडित सुखराम की यह परंपरागत सीट रह चुकी है। 2021 के उपचुनाव में सत्तासीन भाजपा सरकार के होते हुए कांग्रेस टिकट पर प्रतिभा सिंह ने यहां से जीत दर्ज की है।