आनंद शर्मा का मंधला में जोरदार स्वागत हुआ।
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पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा के चुनावी साल में हिमाचल प्रदेश के दौरे से नई सियासी हलचल पैदा हो गई है। राज्यसभा की सदस्यता खत्म होने से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सक्रिय हो गए हैं। मंगलवार को आनंद शर्मा का दून के मंधला में जोरदार स्वागत हुआ। इसके अलावा बद्दी, नालागढ़ और बसाल में भी उनका कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। शिमला के मूल निवासी आनंद शर्मा कांग्रेस के बड़े राष्ट्रीय नेताओं में शुमार हैं। सोलन में जनसभाओं के बाद 24 को शिमला के कलेस्टन में सामुदायिक केंद्र और मशोबरा वृद्ध आश्रम का उद्घाटन करेंगे। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महासचिव रजनीश किमटा सोलन की जनसभाओं और प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर सहित शिमला और सोलन के जिला अध्यक्ष के अलावा अन्य पदाधिकारी उनके कार्यक्रमों में मौजूद रहेंगे।
आनंद विरोधी नेताओं की परेशानी बढ़ी
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद आनंद शर्मा मंडी लोकसभा उपचुनाव के द्रंग में जनसभा की थी। उसके बाद उनका यह विधानसभा चुनाव को लक्षित कर अहम दौरा है। इससे जहां आनंद के समर्थक नेताओं में नए रक्त संचार हो रहा है, वहीं आनंद विरोधी नेताओं की परेशानी बढ़ गई है। हालात यह है कि आनंद विरोधी नेताओं की बोलती बंद है और आनंद के दौरे को लेकर कुछ भी बोलने से कतराने लगे हैं।
वीरभद्र के साथ रहे खट्टे-मीठे संबंध, विक्रमादित्य बांध रहे तारीफों के पुल
आनंद शर्मा को युवा कांग्रेस के रास्ते राजनीति में वीरभद्र सिंह लाए थे। बाद में आनंद ने केंद्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और वह ‘दस, जनपथ’ के करीबी हो गए। इसके बाद जब वह हिमाचल की राजनीति में हस्तक्षेप करते तो वीरभद्र की उनसे खूब तनातनी रही। हालांकि , वीरभद्र की आपत्ति के बाद दोनों के संबंध फिर सामान्य हो जाते। वीरभद्र सिंह से कई मुद्दों पर टकराते रहे छह साल तक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रह चुके सुखविंद्र सुक्खू को भी आनंद का अभयदान था। कुलदीप राठौर को अध्यक्ष बनाने में भी आनंद शर्मा के साथ वीरभद्र सिंह भी सहमत थे। वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य तो आनंद शर्मा की ओर से सांसद निधि से अपने हलके शिमला ग्रामीण को मदद मिलने पर उनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम में प्रदेश और जिलों के पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। वह खुद उनके शिमला के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।