राजधानी की हरियाली बनाए रखने के लिए वन विभाग कई अभियान चला रहा है। हर सीजन में हजारों पौधे रोपे जा रहे हैं। नए पौधों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए वन विभाग कई जगह इनके चारों ओर जालीनुमा पिंजरे लगा रहा है। अब यह पिंजरे ही इन पौधों के लिए मुसीबत बन गए हैं। संवाददाता दीक्षा सरोय ने शहर में इसका जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट :-
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के जाखू और कालीबाड़ी क्षेत्र में रोपे पौधों का विकास अटक गया है। संस्थाओं की मदद से वन विभाग द्वारा लगाए इन पौधों का विकास इनको बचाने के लिए लगाए पिंजरे ही रोक रहे हैं। जंगली जानवरों से पौधों को बचाने के लिए लगाए पिंजरे नए पौधों के लिए मुसीबत बन गए हैं। लोहे के इन पिंजरों की वजह से पौधों का दम घुट रहा है।
कई जगह पौधों का विकास रुक गया है। कई पौधे दम तोड़ चुके हैं। शहर के जाखू क्षेत्र में मंदिर परिसर के साथ लगते जंगल में वन विभाग ने देवदार के पौधे लगाए हैं। चार-पांच साल पहले लगाए इन पौधों के चारों ओर लोहे के जालीनुमा पिंजरे लगाए थे। वन विभाग इन्हें हटाना भूल गया। यहां दर्जनों पिंजरे ऐसे हैं जिनमें पौधों का विकास रुक गया है। यही हाल शहर के कालीबाड़ी क्षेत्र में है। यहां भी जालीनुमा पिंजरे पौधों के लिए मुसीबत बन गए हैं। शहर को हरा-भरा रखने के लिए हर मानसून सीजन में हजारों पौधे रोपे जाते हैं। पौधों को जानवरों से बचाने के लिए उनके चारों तरफ लोहे के पिंजरे लगाए जाते हैं। लेकिन रोपण के बाद वन विभाग और संस्थाएं इन्हें भूल जाती हैं। तीन साल में देवदार, चील और बान के पौधे 2 फीट से ज्यादा बढ़ने चाहिए थे लेकिन लोहे की जाली ने इनका विकास रोक दिया है। कई जगह तने जाली में धंस गए हैं और पौधे सूखकर टेढ़े हो गए हैं।
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वन विभाग के मुख्य वन अरण्यपाल के. थिरुमल ने कहा कि शहर में जिन क्षेत्रों में जाली के कारण पौधों का विकास रुक रहा है। उन्हें चिह्नित कर जालियों को कटवाया जाएगा।
लगातार घट रही हरियाली शिमला शहर में निर्माण कार्यों के चलते हर साल कई पेड़ पौधे काट दिए जाते हैं। 500 से 700 पौधे बरसात में गिर जाते हैं, वहीं कुछ खतरनाक पेड़ काट दिए जाते हैं। इससे साल दर साल शहर की हरियाली घट रही है। ऐसे वन विभाग और संस्थाएं नए पौधे लगाने के लिए आगे तो आती हैं लेकिन उन्हें बचाने और उनके विकास को निरंतर रखने के लिए इनकी सही देखभाल नहीं हो रही है। यही कारण है कि शिमला में ग्रीन कवर बढ़ने की बजाय घट रहा है।