कॉलेज प्राचार्य डॉ. भानु अवस्थी ने बताया कि कुछ माह पहले आईजीएमसी से उच्च केंद्र में रेफर की गई मरीज का यहां रीढ़ के ट्यूमर का इलाज किया गया। मरीज चलने और बिस्तर से उठने में असमर्थ थी। न्यूरोसर्जरी विभाग के सर्जनों की टीम ने मरीज की स्थिति की पूरी जांच की और दिल्ली और चंडीगढ़ से विशेष उपकरण मंगवाकर ऑपरेशन किया।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा (कांगड़ा) के डॉक्टरों ने हिमाचल प्रदेश की पहली स्कोलियोसिस (कुबड़पन) की सफल सर्जरी की है। ऑपरेशन के बाद 20 वर्षीय मरीज अब अपने पैरों पर खड़ी होकर चलने-फिरने में समर्थ है। कुल्लू के बंजार की मरीज को आईजीएमसी शिमला से बड़े संस्थान में रेफर किया गया था। टांडा में पहली बार सफल सर्जरी के बाद चिकित्सकों में खुशी की लहर है। टांडा ने अब नियमित तौर पर स्कोलियोसिस के ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो गई है। कॉलेज प्राचार्य डॉ. भानु अवस्थी ने बताया कि कुछ माह पहले आईजीएमसी से उच्च केंद्र में रेफर की गई मरीज का यहां रीढ़ के ट्यूमर का इलाज किया गया। मरीज चलने और बिस्तर से उठने में असमर्थ थी। न्यूरोसर्जरी विभाग के सर्जनों की टीम ने मरीज की स्थिति की पूरी जांच की और दिल्ली और चंडीगढ़ से विशेष उपकरण मंगवाकर ऑपरेशन किया।
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जटिल ऑपरेशन में उसकी रीढ़ को सीधा करने और उसके स्पाइनल ट्यूमर को निकालने में 11 घंटे का समय लगा। मैराथन ऑपरेशन के बाद मरीज ठीक है। बिना किसी सहारे के चलने-फिरने में सक्षम है। डॉ. भानु ने टीम में शामिल डॉ. अमित जोशी, डॉ. मुकेश कुमार और डॉ. श्रीश नलिन को बधाई दी है। निश्चेतन विभाग के इसके लिए एनेस्थेटिस्ट्स डॉ. जय सिंह, डॉ. मनोज और डॉ. पायल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल में यह अपनी तरह का पहला ऑपरेशन है। भविष्य में कुबड़पन का इलाज अब राज्य में भी हो सकेगा। रोगियों को पीजीआई और एम्स नहीं जाना पड़ेगा।