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GPR Device: मलबे में दबे लोगों का तुरंत चलेगा पता, जीपीआर यंत्र बनेगा मददगार

Fri, 27 Oct 2023 12:41 PM IST
Krishan Singh दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

शिमला में अब आपदा आने पर आधुनिक लाइफ डिटेक्टिंग डिवाइस और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडॉर (जीपीआर) यंत्र मददगार होंगे। समरहिल के शिव बावड़ी त्रासदी से सबक लेते हुए जिला प्रशासन इन उपकरणों की खरीद करने जा रहा है। 
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ज्योति राणा, एडीएम (प्रोटाकॉल) शिमला। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भूकंप और भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील राजधानी शिमला में अब आपदा आने पर आधुनिक लाइफ डिटेक्टिंग डिवाइस और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडॉर (जीपीआर) यंत्र मददगार होंगे। समरहिल के शिव बावड़ी त्रासदी से सबक लेते हुए जिला प्रशासन इन उपकरणों की खरीद करने जा रहा है। इन पर करीब 83 लाख रुपये खर्च होंगे। इन उपकरणों को चलाने का एसडीआरएफ और होमगार्ड के जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। आपदा के समय जिला प्रशासन इन उपकरणों का इस्तेमाल करेगा।

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सरकार की ओर से जिला प्रशासन को इन दोनों उपकरणों की खरीद के लिए फंड जारी किया है। एडीएम (प्रोटाकॉल) ज्योति राणा की अगुवाई में हुई बैठक में दोनों उपकरणों की खरीद पर सहमति बनी है। अब जल्द की कंपनी से इन उपकरणों की खरीदारी की जाएगी। लाइफ डिटेक्टिंग डिवाइस से मलबे में दबे जीवत लोगों का पता लगाया जा सकेगा। इसके साथ में ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार से जमीन के नीचे किसी भी वस्तु एवं ढांचे को बगैर छेड़े हुए उसके नीचे दबी कंक्रीट, पानी, सीवरेज पाइप, केबल एवं अन्य वस्तुओं की पहचान की जा सकती है। आईआईटी रुड़की की टीम ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। जीपीआर जांच के लिए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की बेहतर टीम उपलब्ध रहेगी। 

भूकंप की दृष्टि से शिमला शहर संवेदनशील जोन में शामिल है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण भूस्खलन की भी काफी घटनाएं होती है। घनी आबादी के बीच कई बार आग की घटनाएं सामने आती हंै। अब यह उपकरण मददगार साबित हो सकते है। बरसात में शिव बावड़ी आपदा के दौरान जिला प्रशासन को इन उपकरणों की कमी खली थी लेकिन अब उपकरणों के मिलते ही जिला प्रशासन आपदा के लिए पूरी तैयारियों में होगा। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार से मलबे में करीब 20 मीटर नीचे दबे जीवत व्यक्ति का पता लगाया जा सकेगा।  अभी प्रशासन के पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है जिससे मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाया जा सके। 

आपदा में उपकरणों से मिलेगी मदद 

प्रशासन जल्द ही लाइफ डिटेक्टिंग डिवाइस और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडॉर जल्द की खरीद करने जा रहा है। आपदा में लोगों की जिंदगियों बचाने के लिए इन उपकरणों की मदद ली जाएगी। उपकरणों के संचालन के लिए जवानों को विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी। - ज्योति राणा, एडीएम (प्रोटाकॉल) शिमला।
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क्या है जीपीआर

जीपीआर (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) का उपयोग सतह के नीचे दबी किसी भी चीज की जांच के लिए किया जा सकता है। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की मदद से ऐसे सिग्नल प्राप्त किए जाते हैं जो यह बताने में सक्षम हैं कि किसी भी वस्तु के आंतरिक हिस्से में क्या-क्या मौजूद है। कोई बड़ी चट्टान हो उसके अंदर मौजूद धातु एवं अन्य पदार्थ की पहचान भी संभव है। इस तकनीक का प्रयोग करने के दौरान इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को उस वस्तु तक और स्थान में प्रवेश करवाया जाता है जिसकी जांच करनी होती है। लौटने वाली किरणों और ध्वनि आवृत्तियों का विश्लेषण कर निष्कर्ष पर पहुंचा जाता है।
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