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रिज मैदान शिमला में लगी पट्टिकाएं दे रहीं गांधी की शिमला यात्राओं की गलत सूचनाएं

Tue, 19 Oct 2021 11:26 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला

सार

गांधी की हिमाचल यात्राओं संबंधी विवाद को लेकर मुख्य सचिव रामसुभग सिंह के पास एक शिकायत पहुंची है। महात्मा गांधी पर भाषा एवं संस्कृति विभाग के राज्य संग्रहालय शिमला की ओर से प्रकाशित पुस्तक ‘गांधी इन शिमला’ के अनुसार गांधी ने हिमाचल की नहीं, बल्कि शिमला की दस और एक डगशाई की यात्रा की। तब हिमाचल प्रदेश तो अस्तित्व में ही नहीं था।
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पट्टिकाएं दे रहीं गांधी की शिमला यात्राओं की गलत सूचनाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हिमाचल यात्राओं संबंधी रिज मैदान शिमला में लगी पट्टिकाएं लोगों को गलत सूचनाएं देकर भ्रमित कर रही हैं। गांधी की हिमाचल यात्राओं संबंधी विवाद को लेकर मुख्य सचिव रामसुभग सिंह के पास एक शिकायत पहुंची है। महात्मा गांधी पर भाषा एवं संस्कृति विभाग के राज्य संग्रहालय शिमला की ओर से प्रकाशित पुस्तक ‘गांधी इन शिमला’ के अनुसार गांधी ने हिमाचल की नहीं, बल्कि शिमला की दस और एक डगशाई की यात्रा की। तब हिमाचल प्रदेश तो अस्तित्व में ही नहीं था।
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 रिज मैदान पर गांधी की प्रतिमा के साथ लगी पट्टिका में शिमला के बजाय हिमाचल लिखा है, जबकि इसमें शिमला की भी सब यात्राएं नहीं दर्शाई हैं। तिथियां भी गलत हैं। इससे पर्यटक और आमजन भ्रमित होते हैं। किताब के लेखक विनोद भारद्वाज ने यह मामला एक कार्यक्रम में भी मुख्य सचिव के सामने उजागर किया है। मुख्य सचिव ने राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग को इस गलती दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। अब इन पट्टिकाओें को हटाया जाएगा। इनकी जगह सही सूचना पट्ट दिखेंगे।
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 गांधी की प्रतिमा के साथ ‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हिमाचल यात्रा का विवरण’ शीर्षक  से दो पट्टिकाएं लगी हैं। इनमें उल्लेख है कि महात्मा गांधी ने 12 मई 1921, 11 मई 1931, 13 जुलाई 1931, 25 अगस्त 1931, 29 जून 1940, 27 सितंबर 1940, 23 जून 1945 और 2 मई 1946 को हिमाचल की यात्राएं कीं। इन पट्टिकाओें मेें 1939 में दो बार की शिमला यात्राओं का जिक्र तक नहीं है, जबकि भारद्वाज के अनुसार शिमला शहर में गांधी दस बार आए। ग्यारहवीं बार गांधी डगशाई आए थे। हिमाचल प्रदेश भाषा एवं संस्कृति विभाग के निदेशक पंकज ललित ने कहा है कि मुख्य सचिव के निर्देश पर इन पट्टिकाओं को बदला जाएगा।
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कब-कब शिमला आए गांधी
  • 12 से 17 मई 1921 : वायसरॉय लॉर्ड रीडिंग से खिलाफत आंदोलन, पंजाब में अशांति, सविनय अवज्ञा और स्वराज पर चर्चा की। आर्य समाज मंदिर लोअर बाजार में महिला सम्मेलन में गए। ईदगाह मैदान में जनसभा की।
  • 13 से 17 मई 1931 : गांधी-इरविन समझौते से उत्पन्न समस्याओं पर वायसरॉय लॉर्ड विलिंग्डन, गृह सचिव एच. डब्ल्यू एमर्सन आदि से चर्चा। रिज मैदान पर सार्वजनिक सभा।
  • 15 से 22 जुलाई 1931 : वायसरॉय लॉर्ड विलिंग्डन से लंदन में प्रस्तावित गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर चर्चा।
  • 25 से 27 अगस्त 1931 : वायसरॉय लॉर्ड विलिंग्डन से भेंट। दूसरा समझौते पर हस्ताक्षर।
  • 4 से 5 सितंबर 1939 : अंग्रेजी हुकूमत की ओर से दूसरे विश्वयुद्ध में हिंदुस्तान को शामिल करने पर वायसरॉय लिनलिथगो से बातचीत।
  •  26 से 27 सितंबर 1939 : वायसरॉय लिनलिथगो के निमंत्रण पर द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा।
  • 29 से 30 जून 1940 : वायसरॉय लिनलिथगो के निमंत्रण पर द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न स्थिति पर फिर चर्चा।
  •  27 से 30 सितंबर 1940 :  वायसरॉय लिनलिथगो के निमंत्रण पर द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद भारत की आजादी पर मंत्रणा।
  •  24 जून से 16 जुलाई 1945 : वायसरॉय लॉर्ड वेवल की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक शिमला कॉन्फ्रेंस में वायसरॉय के आग्रह पर गांधी की बतौर सलाहकार शिरकत। महात्मा गांधी ने यहां 23 दिन के प्रवास के दौरान कांग्रेस जनो, वायसरॉय, स्थानीय नेताओं और आम जन से भेंट की।
  •  2 मई से 14 मई 1946 कैबिनेट मिशन के आमंत्रण पर शिमला आगमन
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