परिसर में विभागों के बाहर भी वाहनों की भरमार, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और प्रोफेसरों को हर रोज झेलनी पड़ रहीं दिक्कतें
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एचपीयू में हर रोज आठ हजार लोग करते हैं आवाजाही संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला समरहिल परिसर में पार्किंग की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। हालत यह है कि परिसर में विभागों के बाहर सड़कों के दोनों ओर वाहनों की कतारें लगी रहती हैं।
विवि आने वाले लोगों को डेढ़ किलोमीटर दूर वाहन खड़े करने पड़ते हैं। इससे पैदल चलने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एचपीयू में हर रोज आठ हजार से अधिक लोग आवाजाही करते हैं लेकिन पार्किंग की सुविधा दो सौ वाहनों की भी नहीं है। इस वजह से परिसर और इसके आसपास के क्षेत्र में बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े हो रहे हैं जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका खामियाजा यहां आने वाले छात्रों, कर्मचारियों और प्रोफेसरों को उठाना पड़ रहा है। पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलने से कर्मचारियों और छात्रों को एडवांस्ड स्टडी तथा सांगटी मार्ग पर गाड़ियों को खड़ा करना पड़ता है। गाड़ी होने के बावजूद लोगों को फिर यहां से करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर विश्वविद्यालय पहुंचना पड़ता है।
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वाहनों की अधिक संख्या के कारण सुबह से शाम तक मुख्य मार्ग, विभागों और हॉस्टल के आसपास वाहनों की कतारें लग जाती हैं। वाहन आगे-पीछे खड़े होने से रास्ता संकरा हो जाता है। छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि अवैध पार्किंग के चलते कक्षाओं, लैब और कार्यालय समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार वाहन परिसर से बाहर सांगटी, बालुगंज और एडवांस स्टडी सड़क तक ले जाना पड़ता है। अवैध और बेतरतीब पार्किंग के कारण एंबुलेंस, फायर टेंडर और अन्य आपातकालीन वाहनों का मार्ग भी बाधित होता है। बारिश और बर्फबारी के दिनों में स्थिति गंभीर हो जाती है। कई विभागों के कर्मचारी और फैकल्टी सदस्य पार्किंग खोजने के लिए हर रोज परिसर में कई चक्कर लगाते हैं, जिससे समय की बर्बादी और तनाव बढ़ जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाइब्रेरी और पोटर हिल क्षेत्र में बहुमंजिला पार्किंग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अनुमानित लागत लगभग 18 करोड़ है। परियोजना के पूरा होने तक छात्रों और कर्मचारियों को अस्थायी पार्किंग स्थलों और दोपहिया तथा चारपहिया वाहनों के लिए अलग व्यवस्था की आवश्यकता बनी हुई है।
पार्किंग की है मुश्किल : रितिका छात्रा रितिका शर्मा ने कहा कि पार्किंग नहीं मिलती। कई बार स्कूटी सड़क पर खड़ी करनी पड़ती है। समय पर क्लास पहुंचना मुश्किल हो जाता है। रोजाना तनाव बढ़ जाता है।
पार्किंग ढूंढने में लग जाते हैं 20 मिनट : मोहित
छात्र मोहित डोगरा ने कहा कि सुबह पार्किंग ढूंढने में 20 मिनट से ज्यादा लग जाते हैं। दोपहिया या कार के लिए जगह मिलना मुश्किल हो गया है। समाधान नहीं हुआ तो रोजाना संघर्ष करना पड़ेगा।
कार्यालय पहुंचने में होती है देरी : नरेश
कर्मचारी नरेश शर्मा ने कहा कि गाड़ी के लिए पार्किंग न मिलने से रोजाना आधा घंटा व्यर्थ जाता है। काम पर असर पड़ता है और कार्यालय जाने में देरी होती है। अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था जरूरी है।