अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में राज बावा ने भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पहले गेंदबाजी करते हुए बावा ने इंग्लैंड के पांच विकेट झटके, उसके बाद विपरीत परिस्थितियों में बल्लेबाजी करते हुए 35 रनों का योगदान भी दिया। बावा का ननिहाल सिरमौर के पांवटा साहिब में है। उनका जन्म नाहन अस्पताल में हुआ था। इसके कुछ समय बाद राज के पिता सुखविंद्र बावा पंजाब चले गए। एक बार सिरमौर क्रिकेट एसोसिएशन के आग्रह पर उन्होंने नाहन आकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद वह यहां नहीं आए। पारिवारिक परिस्थितियां कुछ ऐसी थीं कि राज को अपनी मां का प्यार भी पिता से मिला।
पिता सुखविंद्र ने कड़ी मेहनत से बेटे को इस काबिल बनाया कि वह आज स्टार बनकर उभरा है। अपनी चोट के कारण पिता जो सपना साकार नहीं कर पाए थे, उनके सपने के बेटे ने पूरा किया। राज बावा के पिता सुखविंद्र सिंह बावा चंडीगढ़ में एक विख्यात क्रिकेट कोच हैं। उन्होंने न केवल अपने बेटे को तराशा, बल्कि ऐसे खिलाड़ियों को भी काबिल बनाया, जो आईपीएल और भारतीय टीम का हिस्सा बने। ऐसे खिलाड़ियों की फेहरिस्त काफी लंबी है।
फोन पर बातचीत में राज के पिता सुखविंद्र ने कहा कि बेटे ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह नहीं बता सकते कि भारतीय टीम में बेटे की एंट्री में कितना वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि बेटे का जन्म नाहन में हुआ है। मौजूदा समय में वह चंडीगढ़ में सेटल हैं। वह अब तक सैकड़ों खिलाड़ियों को तराश चुके हैं। उधर, नाहन से संबंध रखने वाले चंडीगढ़ में रहे आईएनएस फुटबाल कोच नरेंद्र थापा से भी क्रिकेट कोच सुखविंद्र की अच्छी दोस्ती रही। उनका कहना है कि सुखविंद्र सिंह एक बड़े सुलझे हुए इंसान हैं।