राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा और महासचिव अवधेश सरोच ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई फैसला नहीं लिया है।
हिमाचल प्रदेश के 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार से स्थायी नीति बनाने की मांग की है। शिमला के राम मंदिर हाल में बुधवार को प्रदेश भर से आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि जुटे और समस्याओं पर मंथन किया। राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि अन्य कर्मचारियों की तरह आउटसोर्स कर्मचारियों को तय समय के भीतर स्थायी किया जाए। कहा कि ठोस नीति नहीं बनाई गई तो सरकार के खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपनाया जाएगा।
विज्ञापन
बैठक के बाद संघ के अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा और महासचिव अवधेश सरोच ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई फैसला नहीं लिया है। हर बार आश्वासन ही दिए गए। उनका कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारी सोसायटी और कंपनियों के माध्यम से लगे हैं। ये कर्मी पिछले 18 साल से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इन्हें स्थायी करने के बारे में सोचा नहीं जा रहा है।
कहा कि सोसायटी या कंपनी विभाग की मांग के अनुसार पैनल बनाकर विभाग के पास नाम भेजती है। इसके बाद विभागीय कमेटी इंटरव्यू लेकर आउटसोर्स पर रखती है। इसके बाद भी इनको नियमित नहीं किया जा रहा। सरकार से मांग की जा रही है कि अन्य कर्मचारियों की तरह आउटसोर्स कर्मियों को भी तय समय के भीतर रेगुलर किया जाए।