सिंघा ने 15 फरवरी 2018 तक प्रदेश में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों के बारे में जानकारी चाही और पूछा कि इनकी सेवा शर्तों को नियमित करने के लिए सरकार ने कोई नीति बनाई है या नही? उन्होंने ठेकेदारों को दी गई राशि का ब्योरा भी मांगा।
चिंता जताई कि इसमें ठेकेदार कमीशन ले रहे हैं। ईपीएफ जो कंपनी से कटना होता है, उसे भी कर्मचारियों से ही काटा जा रहा है। हर्षवर्द्धन चौहान ने भी कहा कि प्रदेश में 25 हजार के करीब आउटसोर्स कर्मचारी हैं। सरकार कम से कम न्यूनतम वेतन तो निर्धारित करे।
इस सवाल के जवाब में सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि सूचना एकत्रित की जा रही है। जब सूचना एकत्र कर दी जाएगी, तभी इस बारे में कोई जवाब दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नियमों को लागू कर कर्मचारियों का शोषण नहीं होने देंगे।
खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सरस्वतीनगर में खेल स्टेडियम के लिए 90 बीघा जमीन उपलब्ध है। यहां पर खेल स्टेडियम का शिलान्यास पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा ने वर्ष 2002 में किया था।
एक करोड़ 35 लाख रुपये इस पर खर्च किए जा चुके हैं। पूर्व सरकार में अनदेखी की वजह से मैदान खंडहर हो गया है। उन्होंने कहा कि मैदान में 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए जितना पैसा खर्च होगा, उसे किया जाएगा।
शिक्षा विभाग से मिली सूचना के मुताबिक वर्तमान में खेल मैदान को हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन के सौजन्य से समतल किया जा रहा है। निकास नालियों का निर्माण भी किया जा रहा है।
खेल स्टेडियम के पैवेलियन ब्लॉक की मरम्मत की जानी है। खेल मंत्री ने यह जानकारी जुब्बल-कोटखाई के भाजपा विधायक नरेंद्र बरागटा के सवाल के जवाब में दी।
कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब देते हुए बताया है कि भुंतर हवाई अड्डे के विस्तारीकरण की योजना है। सरकार विस्तार के लिए कार्य कर रही है। सरकार द्वारा आईआईटी रूडकी से रिपोर्ट तैयार करवाई गई है।
प्रदेश में पांच रज्जू मार्गों का निर्माण कार्य जारी है। विधायक मुकेश अग्निहोत्री के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि शिमला में पर्यटन सूचना केंद्र से लिफ्ट-माल रोड तक, धर्मशाला-मैक्लोडगंज, आदि हिमानी से चामुंडा, पलचान से रोहतांग और कुल्लू
बाईपास से बिजली महादेव तक पांच रज्जू मार्गोें का निर्माण कार्य जारी है। इन रज्जू मार्गोें के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ करार हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अन्य रज्जू मार्गों की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
ऊर्जा राज्य हिमाचल प्रदेश में बीते तीन सालों के दौरान कोई भी हाइड्रो प्रोजेक्ट चिह्नित नहीं किया गया है। देहरा से विधायक होशियार सिंह द्वारा पूछे गए सवाल पर ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने यह लिखित जवाब दिया।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री ने विधायक अरुण कुमार के सवाल का लिखित जवाब देते हुए बताया कि बीते तीन वर्षों में राज्य विशेष अनुदानित योजना के तहत आवंटित किए जाने वाले
खाद्य तेल, दालें, नमक और चीनी की आपूर्ति टेंडर आधार पर की गई है। चावल एवं गेहूं की आपूर्ति लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत भारतीय खाद्य निगम से की गई है।