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पहाड़ों में पहली बार दिखा दुर्लभ प्रजाति का ये जानवर, हर कोई हैरान

Wed, 28 Mar 2018 03:44 PM IST
दिनेश जस्पा, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के म्याड़ नाले में पहली बार दुर्लभ प्रजाति का कस्तूरी मृग दिखा है। लोक निर्माण विभाग में कार्यरत कर्मचारी जसरथ निवासी आमिर ने इसे अपने कैमरे में कैद किया है।

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डीएफओ जयराम ठाकुर ने फोटो देखने के बाद पुष्टि की कि यह कस्तूरी मृग ही है। उन्होंने कहा कि अभी तक लोगों से सुना था कि यहां कस्तूरी मृग होता है, लेकिन इसके होने के पहली बार पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

अब वन विभाग का अमला हरकत में आ गया है। कस्तूरी मृग की तलाश की जा रही है, ताकि उसे शिकारियों से बचाया जा सके।

उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि दुर्लभ प्राणी बेहद शर्मीले स्वभाव का होता है, इसलिए इसे डराएं न। उन्होंने कहा कि इस इलाके में और कितने कस्तूरी मृग हैं, इसकी तलाश की जाएगी।

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क्या है कस्तूरी मृग

कस्तूरी मृग हिमालयी क्षेत्र में 2400 से 3600 मीटर तक की ऊंचाई पर तिब्बत, नेपाल, उत्तराखंड, चीन, साइबेरिया, कोरिया आदि के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। इसके शरीर का रंग बदलता रहता है। पेट और कमर के निचला भाग लगभग सफेद ही होता है और बाकी शरीर कत्थई भूरे रंग का होता है।

कस्तूरी मृग पहाड़ी जंगलों की चट्टानों के दर्रों में रहता है। साधारणतया यह अपने निवास स्थान को बर्फबारी में भी नहीं छोड़ता है। इसके कान लंबे और गोलाकार होते हैं और इसकी श्रवण शक्ति बहुत तीक्ष्ण होती है। इनका भार 7 से 17 किलो तक होता है। कस्तूरी केवल नर मृग में पाई जाती है जो इस के पेट के निचले भाग में जननांग के समीप होती है।

एक मृग में लगभग 30 से 45 ग्राम तक कस्तूरी पाई जाती है। नर की बिना बालों वाली पूंछ होती है। इसके सींग नहीं होते। पीछे के पैर आगे के पैर से लंबे होते हैं। कस्तूरी का उपयोग औषधि के रूप में दमा, मिर्गी, निमोनिया आदि की दवा बनाने में होता है। कस्तूरी से बनने वाला इत्र अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। कस्तूरी मृग संकटग्रस्त दुर्लभ प्रजातियों में शामिल है।
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