हिमाचल सरकार की ओर से दिए गए एक साल के सेवा विस्तार में सरकारी कर्मचारी उलझ गए हैं। इस योजना को लेकर तरह तरह की शंकाएं कर्मचारियों में हैं। खासकर उस प्रावधान से, जिसमें ये व्यवस्था की गई है कि राज्य सरकार यदि संतुष्ट होगी, तभी कर्मचारी को 58 से 59 साल तक एक साल और मिलेगा।
पढ़ें, खुशखबरी! एक साल सबकी बढ़ी सरकारी नौकरी
इससे चयन में भेदभाव और राजनीतिक आधार पिक एंड चूज की आशंका है। इन्हीं शंकाओं को देखते हुए सचिवालय के चार मुख्य कर्मचारी संगठनों के महासंघ ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की है।
सचिवालय सेवाएं कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा और महासचिव संजीत शर्मा की अगुवाई में एक दल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिला और आग्रह किया कि एक साल सेवाविस्तार के बजाय सेवानिवृत्ति की उम्र ही 59 साल कर दी जाए, ताकि कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर सभी देय लाभ सुनिश्चित हो जाएं।
बैठक में राजेश भारद्वाज, राजेश शर्मा, शांतिस्वरूप, अमर सिंह, संजीव शर्मा और राकेश सिंघा आदि शामिल हुए। कर्मचारियों ने शंका जताई कि इस स्कीम का लाभ वर्तमान प्रारूप में बिना भेदभाव सबको मिलेगा।
इसलिए सरकार विसंगतियों को दूर का भ्रम को मिटाए। महासंघ के प्रधिनिधियों ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री ने पूरी बात सुनी और इस बारे में कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
उधर दूसरी ओर सोमवार को वित्त विभाग ने कैबिनेट फैसले के बाद फाइल को लीगल स्क्रूटनी के लिए विधि विभाग को भेज दिया है। यहां से आने के बाद इस स्कीम की अधिसूचना होगी।
अधिसूचना जारी होने की तिथि से ये स्कीम लागू हो जाएगी। माना जा रहा है कि 27-28 मई तक ये अधिसूचित हो जाएगी, ताकि इसी महीने रिटायर होने वाले कर्मचारी भी इसके लिए आवेदन कर सकें।
6 महीने पहले आवेदन करना होगा
कैबिनेट में भेजे गए प्रारूप के मुताबिक कर्मचारियों को इस स्कीम के तहत एक साल और नौकरी करने के लिए कर्मचारियों को आवेदन करना होगा। ये आवेदन 6 महीने पहले विभागाध्यक्ष को करना होगा। आमतौर पर रिटायर होने वाले कर्मचारी के पेंशन कागज भी 6 महीने पहले एजी को भेजने होते हैं। इसी आधार पर इसमें भी 6 महीने का वक्त तय किया जा रहा है, ताकि एजी को दस्तावेज भेजने के बजाए आवेदन करवाया जाए।
विभागाध्यक्ष को लेना है फैसला
कर्मचारियों के ओर से आने वाले आवेदन पर संबंधित विभाग के अध्यक्ष को फैसला लेना है। वह कर्मचारियों के एसीआर के आधार पर ये फैसला लेगा या मेडिकल रिपोर्ट पर? ये अभी तय नहीं है। एक और दुविधा ये भी है कि जहां कर्मचारियों के जिला कैडर हैं, वहां अनुमति कौन देगा और इस अनुमति को कोषागार के साथ कैसे अपलोड किया जाएगा। मसलन जेबीटी शिक्षकों की मंजूरी निदेशक देंगे या संबंधित जिलों के उपनिदेशक?
600 करोड़ देनदारी टाली सरकार ने
वित्त विभाग का आंकड़ा है कि आजकल हर साल औसतन 3500 से 4000 सरकारी कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। लेकिन 2016 से 2018 तक रिटायरमेंट ज्यादा हैं और हर साल औसतन 6 से 8000 कर्मचारी रिटायर होंगे। वर्तमान में रिटायरमेंट पर दिए जाने वाले लाभों पर सरकार करीब 600 करोड़ खर्च कर रही है। एक साल सेवाविस्तार देकर सरकार ने ये खर्चा एक साल के लिए टाल लिया है। हालांकि ये समस्या का अस्थाई हल है।
आप बताइए अपनी राय
हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों को क्या एक साल और मिलना चाहिए? क्या राज्य सरकार की वर्तमान स्कीम से आपको कुछ शंकाएं हैं? या फिर केंद्र सरकार की तर्ज पर रिटायरमेंट एज बढ़नी चाहिए। कर्मचारी संगठन या अन्य कोई भी प्रभावित पक्ष इस बारे में अपनी राय हमें भेज सकते हैं। फोटो सहित राय ई-मेल aushimla@gmail.com पर भेजें या फैक्स करें 0177-2629301 पर। ‘अमर उजाला’ इस राय को सरकार तक पहुंचाएगा।