ऊना के मैड़ी में 3 फरवरी 1931 को जन्मे चरणजीत सिंह ने टोक्यो ओलंपिक 1964 में इतिहास रच दिया था। इनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने इस ओलंपिक में स्वर्ण जीता था। अब तक हिमाचल के एक ही खिलाड़ी ने भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी संभाली है।
57 साल पहले ओलंपिक में हिमाचल के एक खिलाड़ी ने अपना नाम सुनहरी अक्षरों में लिखवाया था। भारतीय हॉकी टीम की कमान संभालते हुए ऊना के मैड़ी के रहने वाले चरणजीत सिंह ने देश को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलवाया था। संयोग यह है कि इस बार भी ओलंपिक टोक्यो में होने जा रहा है। ऊना के मैड़ी में 3 फरवरी 1931 को जन्मे चरणजीत सिंह ने टोक्यो ओलंपिक 1964 में इतिहास रच दिया था। इनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने इस ओलंपिक में स्वर्ण जीता था। अब तक हिमाचल के एक ही खिलाड़ी ने भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी संभाली है। टोक्यो ओलंपिक 1964 में ऊना के चरणजीत सिंह को टीम इंडिया की कप्तानी मिली थी।
विज्ञापन
टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए इस ओलंपिक में देश को गोल्ड मेडल दिलाया था। हालांकि, ऊना के हॉकी खिलाड़ी दीपक ठाकुर भी ओलंपिक में हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन तब टीम ने कोई मेडल नहीं जीता था। इस बार हिमाचल के बॉक्सर आशीष को मेडल का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। चरणजीत सिंह कई कार्यक्रमों में कह चुके हैं कि उनका एक ही सपना है कि भारतीय टीम फिर से ओलंपिक में पदक जीते। हालांकि, पिछले कई ओलंपिक में चरणजीत सिंह का सपना पूरा नहीं हो सका है। इस बार का संयोग यह है कि ओलंपिक टोक्यो में होने जा रहा है। जहां, 57 साल पहले चरणजीत सिंह की टीम ने गोल्ड जीता था।