फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पेपर लीक मामला : एनएसयूआई ने शिमला में फूंका मुख्यमंत्री का पुतला

Sat, 07 May 2022 07:33 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुतला फूंकने से रोकने के प्रयास में पुलिस कर्मियों के साथ धक्कामुक्की भी हुई। 
विज्ञापन
उपायुक्त कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा के पेपर लीक मामले में एनएसयूआई ने शनिवार को दोपहर बाद उपायुक्त कार्यालय शिमला के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदेशाध्यक्ष छत्तर सिंह ठाकुर की अगुवाई में छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने पेपर लीक और विभिन्न भर्तियों में हुई धांधलियों के विरोध में नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सीएम का पुतला जलाने का प्रयास किया।

विज्ञापन




पुतला फूंकने से रोकने के प्रयास में पुलिस कर्मियों के साथ उनकी धक्कामुक्की हो गई। करीब पांच मिनट की खींचतान के बाद एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्र नेताओं विनु मेहता, रजत भारद्वाज, प्रवीण मिन्हास, प्रकाश कन्याल, रणवीर, कुलवंत, आशीष सोहटा, अभय रॉयजादा सहित अन्य ने नारेबाजी कर विरोध जताया। छत्तर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के कार्यकाल में बेरोजगारी चरम पर है। भर्तियों में भ्रष्टाचार है। 

कहा कि कांस्टेबल की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने से प्रदेश के 74 हजार युवाओं के साथ धोखा हुआ  है। इससे पहले जेओए (आईटी), पटवारी, एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती सहित कई भर्तियों में गड़बड़ियां होती रही हैं। कहा कि सबका साथ, सबका विकास की बात करने वाली सरकार ने सिर्फ अपने चहेतों को  रोजगार देने का कार्य किया है। सरकार ने बेरोजगार युवाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।  कहा कि प्रश्न पत्र लीक होने का मामला उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। 

विज्ञापन

पेपर लीक मामले को दबाने में लगी है सरकार : मुकेश

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जयराम सरकार पेपर लीक मामले को दबाने में लगी है। यह मामला पहले ही उजागर होने पर अफसरों पर दबाव डाला गया। तुरंत परिणाम निकालने के आदेश दिए गए। ईमानदार अधिकारियों ने मामले में कार्रवाई कर डाली। उन्होंने सीएम को सलाह दी है कि मामले में दबाव के साथ किसी भी तरह का पर्दा न डालें। ऊना विश्राम गृह में शनिवार को प्रेस वार्ता में मुकेश ने कहा कि 74,000 बेरोजगारों का गुनहगार कौन है। इस घटना ने प्रदेश को शर्मसार किया है। सत्ता के संरक्षण में पेपर लीक करने वाली गैंग काम कर रही है। पेपर की गोपनीयता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने सीएम जयराम पर चुटकी ली कि उन्हें एसआईटी बनाने की आदत है, ताकि मामले को दफन किया जा सके। उन्होंने एसआईटी के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिनके अधीन कांड होते हैं, उन्हें ही एसआईटी में शामिल कर दिया जाता है। पूरा मामला उजागर होने के बाद अब सीएम दिखावे के लिए दखल दे रहे हैं। जयराम सरकार के कार्यकाल में सौदेबाजी का यह पहला मामला नहीं है। दोबारा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को किस तरह मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों पर मुंह न खोलने का दबाव डाला जा रहा है। मंत्री नाटी डालने में व्यस्त हैं। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय डोगरा, ब्लॉक अध्यक्ष विनोद बिट्टू और अन्य मौजूद रहे।
--
विज्ञापन

बैरंग लौटे पुलिस मुख्यालय में पक्ष रखने आए अभ्यर्थी 

 पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा रद्द होने पर अपना पक्ष रखने के लिए पुलिस मुख्यालय गए अभ्यर्थी शनिवार को बैरंग लौटे। डीजीपी नहीं बैठे थे। वह एक हफ्ते के अवकाश पर हैं। भर्ती करवाने वाले प्रभाग के प्रमुख आईजीपी एपीटी जेपी सिंह और गृह सचिव भरत खेड़ा भी इन दिनों अवकाश पर हैं। सचिव रजनीश को अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। अभ्यर्थियों ने स्टाफ से बात की तो उन्हें बताया गया कि डीजीपी और संबंधित अधिकारी पुलिस मुख्यालय में मौजूद नहीं हैं। बाकी अधिकारी अतिरिक्त कार्यभार देख रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षा रद्द करने से पहले अगर सरकार इस प्रकरण की जांच करती तो अच्छा होता। 

शनिवार को उम्मीदवारों ने लिखित बयान दिया कि किन्नौर जिले से 18 अभ्यर्थियों का चयन हो गया था। चार जुलाई को उन्हें पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज डरोह में प्रशिक्षण के लिए जाने को कह दिया था। सरकार के भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले से उन्हें मानसिक आघात लगा है। पुलिस भर्ती में गड़बड़ी गंभीर मामला है, मगर कांस्टेबलों का जिलावार चयन किया है तो जहां भी यह गड़बड़ी हुई, वहां जांच होनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री ने उनके भविष्य पर विचार किए बगैर भर्ती परीक्षा रद्द की है। प्रदेश में 300 से अधिक अभ्यर्थी किन्नौर, लाहौल-स्पीति और ऊना मेें अंतिम परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुके थे। उन्होंने माना कि परीक्षा में धांधली होने पर कार्रवाई करना सही है, मगर जिन्होंने कुछ गड़बड़ नहीं किया है उन्हें राहत दी जानी चाहिए। सरकार को परीक्षा रद्द करने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें