नियमों के खिलाफ लाडलों को पीएचडी में दिए प्रवेश को रद्द करने का किया आग्रह
क्रॉसर
संगठन के नेताओं ने ईसी सदस्यों को सौंपा मांगपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एनएसयूआई की विश्वविद्यालय इकाई ने शनिवार को हुई ईसी की बैठक में भाग लेने आए सदस्यों को मांगपत्र सौंपकर विश्वविद्यालय में हुई शिक्षक भर्तियों की न्यायिक जांच करवाने की मांग की।
एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष वीनू मेहता, प्रदेश महासचिव यासीन बट्ट, इकाई अध्यक्ष रजत भारद्वाज सहित कई छात्र नेताओं ने मांगपत्र के माध्यम से पीएचडी में यूजीसी के नियमों को दरकिनार कर अधिकारियों के बच्चों को दिए प्रवेश को रद्द करने और विवि में खुल रही निजी दुकानों की जगह ओपन पुस्तकालय खोलने की मांग उठाई।
एनएसयूआई ने अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा छात्र वर्ग परीक्षा सेंटर भवन के ऊपर निर्मित स्थान को किसी निजी रेस्तरां फर्म को न देकर उस स्थान पर विवि के छात्रों और कर्मचारियों के लिए कैंटीन खोलने का आग्रह किया। बीएड, बीवॉक और सभी यूजी-पीजी कक्षाओं के लंबित परीक्षा परिणाम घोषित करने, ईआरपी सिस्टम में सुधार करने, कोरोना से बढ़ी मुश्किलों को देख छात्रों की छह माह की फीस माफ करने, पिछले दरवाजे से हो रही आउटसोर्स भर्तियों को रोककर नियमित भर्ती करने जैसी मांगे उठाईं। वीनू मेहता ने एमफिल पीएचडी छात्रों को छात्रावास आवंटित करने और शोधर्थियों को फेलोशिप देने की मांग भी की।