प्रदेश में शहरी युवाओं को आजीविका कमाने के लिए नया मौका मिलने वाला है। राज्य में इसी साल से राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन शुरू हो रहा है।
प्रोजेक्ट में राज्य को इस साल करीब 46 करोड़ रुपये मिलेंगे। शहरों की करीब 50 फीसदी आबादी इस प्रोजेक्ट के दायरे में आएगी। प्रोजेक्ट के जरिये पहले युवाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा और फिर स्वरोजगार के लिए सस्ता लोन भी।
प्रोजेक्ट से शहरी निकाय क्या लाभ ले सकते हैं? ये समझाने के लिए शिमला में शहरी विकास विभाग ने वर्कशाप करवाई। इसमें जिला मुख्यालयों की 10 नगर परिषदों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों और कार्यकारी अधिकारियों को बुलाया गया था।
ऐसे लागू होगा पूरा प्रोजेक्ट
पहले शहरों में स्वयं सहायता समूह बनाए जाएंगे। इन्हें प्लंबर, डेयरी, ब्यूटीशियन, राफ्टिंग, माली, कारपेंटर की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रति व्यक्ति 18 हजार रुपये ट्रेनिंग पर शहरी विकास विभाग नगर परिषद के माध्यम से खर्च करेगा।
ट्रेनिंग पूरा करने वाले युवाओं को प्रति व्यक्ति 2 लाख और समूह को 10 लाख रुपये का लोन स्वरोजगार के लिए 7 फीसदी ब्याज पर दिया जाएगा। प्रोजेक्ट में रेहड़ी फड़ी वालों को भी नए सिरे से बसाया जाएगा।
शहरी विकास विभाग के निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने बताया कि कुल 28 शहरी निकायों में ये प्रोजेक्ट शुरू होगा। शहरी आजीविका मिशन में बड़े शहरों में सिटी लाइवलीहुड सेंटर बनाया जाएगा। ये एक ऐसा केंद्र होगा, जहां शहर के सभी प्लंबर, कारपेंटर, मेकेनिक, इलेक्ट्रीशियन पंजीकृत होंगे। ये एक कॉल सेंटर के जरिये चलेगा, और शहर के लोग अपनी जरूरत के अनुसार यहां से सेवाएं ले सकेंगे।