प्रदेश की जनता के अधिकांश कार्य अब जनसभाओं में ही निपटाए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को ग्रामसभाओं में उपस्थित होना अनिवार्य कर दिया है। इसमें खासकर स्वास्थ्य, पशुपालन, बागवानी, बिजली बोर्ड, आईपीएच और राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।
अगर कोई अधिकारी और कर्मचारी ग्रामसभा में उपस्थित नहीं होता है तो सरकार की ओर से इन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। पंचायत प्रतिनिधि और गांव के लोग इस बारे प्रदेश सरकार और जिला उपायुक्त को ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सौंपेंगे जो बैठक में उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
ग्रामसभाओं में जनता से जुड़े हर मामले पर चर्चा होती है। पंचायतों में क्या-क्या विकास कार्य किए जाने हैं। ग्रामसभा में सहमति से इसकी शेल्फ डाली जाती है। दूसरे, अधिकारियों और कर्मचारियों को यह जानकारी रहती है कि प्रदेश सरकार की ओर से जनता के लिए क्या-क्या विकासात्मक योजनाएं चलाई जा रही हैं?
योजनाओं को सिरे चढ़ाने के लिए क्या-क्या औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। इसकी जानकारी अधिकारी और कर्मचारियों के पास रहती है। कई बार ग्रामसभा में ऐसे मामलों पर भी सहमति बन जाती है, जो नहीं हो सकते। यह कार्य विभागीय स्तर पर लटक जाते हैं। जनता को सही तरीके से गाइड करने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों का बैठक में होना उपस्थित किया गया है।
ग्रामसभाओं में अधिकारियों और कर्मचारियों का उपस्थित होना अनिवार्य किया है। पंचायत एरिया में आने वाले सभी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी ग्राम सभाओं में उपस्थित रहेंगे। अगर कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं होता है तो कार्रवाई होगी।- अनिल शर्मा, पंचायती राजमंत्री