राजधानी शिमला में पानी की किल्लत दूर करने के लिए तैयार की 643 करोड़ की बहुउद्देशीय परियोजना को केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल गई है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए विश्व बैंक 514 करोड़ रुपये देगा जबकि 129 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार खर्च करेगी। तीन साल में प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश सरकार का दावा है कि प्रोजेक्ट के तहत कोल डैम से शिमला तक पानी पहुंचाया जाएगा।
शहर का वाटर डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम सुदृढ़ होगा और शहर में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना से राजधानी शिमला में नगर निगम क्षेत्र के अलावा विशेष योजना क्षेत्र (एसपीए) और साथ लगते क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित होगी। सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित बैठक में योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। परियोजना के तहत कोल डैम से शिमला को पेयजल की आपूर्ति होगी।
इसके अतिरिक्त पानी की लीकेज रोकने, पाइप लाइन की रिपेयर और नई पाइप लाइन बिछाने का काम किया जाएगा। पूरे शहर को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने का काम भी इस परियोजना के तहत होगा। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की रिपेयर और नए प्लांट लगाने की योजना है। दिल्ली में आयोजित बैठक में आईपीएच के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीसी धीमान और एमसी आयुक्त पंकज राय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने शिमला शहर की सालों से चली रही आ रही पानी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी तथा लोगों को पानी भी भरपूर मिलेगा। महापौर संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम के हाउस में इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसकी मंजूरी मिलने के बाद अब शहर में पानी का निजीकरण नहीं होगा। इंजीनियरिंग प्रिक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन मोड पर नगर निगम और आईपीएच प्रोजेक्ट पर काम करेंगे।
नगर निगम आयुक्त पंकज राय का कहना है कि प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के बाद अब पूरे शहर को सीवरेज कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। शहर में 65 फीसदी ही सीवरेज कनेक्टिविटी है, इसे सौ फीसदी किया जाएगा। निगम के 7 वार्ड जहां अभी तक सीवरेज कनेक्टिविटी नहीं है सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी। पानी की पुरानी लाइनों की मरम्मत होगी और आवश्यकतानुसार नई लाइनें भी बिछाई जाएगी। इससे शहर के हजारों लोगों को फायदा होगा तथा शहर में स्वच्छता आएगी।
हाईकोर्ट ने तलब की पानी पर स्टेटस रिपोर्ट
नगर निगम क्षेत्र में पानी की समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, नगर निगम आयुक्त और बिजली बोर्ड के कार्यकारी निदेशक को तलब किया है। राज्य सरकार ने अदालत को शपथ पत्र के माध्यम से अवगत करवाया कि पेयजल विभाग निगम को रोजाना औसतन 40 एमएलडी पानी की आपूर्ति कर रहा है।
सरकार के अनुसार शिमला नगर निगम की परिधि में प्रतिदिन लगभग 27 एमएलडी पानी की जरूरत पड़ती है। व्यवसायिक संस्थानों और अन्य संस्थानों को लगभग 45 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। अदालत को बताया कि शिमला शहर में पानी के रिसाव को रोकने के लिए वर्ल्ड बैंक से स्वीकृत परियोजना के तहत लगभग एक लाख 38 हजार जिआई पाइप और एक लाख 32 हजार अन्य पाइप बदलेंगी। बताया गया कि केोल डैम उठाऊ जल परियोजना को भी स्वीकृति मिल गई है।
प्रदेश सरकार का जताया आभार
शिमला
शहर के लिए 643 करोड़ की पेयजल योजना को स्वीकृति मिलने पर छोटा शिमला
वार्ड के पार्षद सुरेंद्र चौहान ने प्रदेश सरकार का आभार जताने के लिए हाउस
की तरफ से धन्यवाद प्रस्ताव रखा। सभी पार्षदों ने धन्यवाद प्रस्ताव का
समर्थन किया। कहा कि इस प्रोजेक्ट के तैयार होने के बाद शिमला शहर के लाखों
लोगों को लाभ मिलेगा। शहर में पर्याप्त पानी की सप्लाई होने से जलसंकट से
छुटकारा मिल जाएगा।
14 एमएलडी पानी की होती है बर्बादी
शहर को
पानी की आपूर्ति करने वाली परियोजनाओं से शिमला को 35 से 40 एमएलडी पानी
मिलता है, इसमें से 14 एमएलडी के करीब पानी लीकेज में बर्बाद हो जाता है।
लीकेज दुरुस्त होने के बाद शहर में जल संकट की संभावना नहीं रहेगी। कोलडैम
से शिमला को पानी मिलने के बाद पर्यटन सीजन में भी पानी की किल्लत नहीं
होगी। यही नहीं लोगों को कोलडैम प्रोजेक्ट के तहत भरपूर पानी नसीब होगा।