सरकार ने जनवरी 2016 तक राज्य में सभी का आधार नामांकन करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में अभी तक 67 लाख नागरिकों का आधार नामांकन किया जा चुका है, जो कुल जनसंख्या का 98 प्रतिशत है। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पांच वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या के प्रारंभिक अंतर को चिन्हित किया जा रहा है।
इस अंतर को पूरा करने, आधार नामांकन कार्य को पूरा करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने रणनीति बनाई है। इसके तहत 5 से 18 वर्ष के आयुवर्ग का स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से नामांकन किया जाएगा। पांच वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का आंगनबाड़ी के माध्यम से आधार कार्ड बनाया जाएगा।
इसके लिए 450 किटों की खरीद की गई, जिन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उपलब्ध करवाया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आधार नामांकन कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रदेश की 3243 पंचायतों में प्रत्येक पंचायत से एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रशिक्षित किया जाएगा और 800 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का कार्य पूरा कर लिया गया है।
शेष को इसी माह तक प्रशिक्षित कर लिया जाएगा। 200 किटें शिमला व सोलन में पहले ही क्रियाशील की जा चुकी हैं। नामांकन कार्य जनवरी, 2016 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। 114 स्थायी नामांकन केंद्र खंड/जिला स्तर पर क्रियाशील हैं, शेष अन्य स्थलों को भी सीएससी के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
100 से अधिक अतिरिक्त स्थायी नामांकन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं और 214 नामांकन केंद्रों को संबंधित खंडों के भीतर जहां वे उपलब्ध हैं, को विभिन्न स्कूलों व महाविद्यालयों में भेजा जा रहा है। उन जिलों जहां अन्यों की तुलना में कम कवरेज हुई है की विशेष जरूरतों को पूरा करने के लिए 24 मोबाइल वैन तैनात की गई हैं।
18 वर्ष आयु वर्ग की आधार कवरेज लगभग 102 प्रतिशत है। शेष जनसंख्या यदि काई नामांकन से रह गई है, का नामांकन फील्ड में तैनात स्थायी नामांकन केंद्रों में पूरा किया जाएगा। आधार नामांकन का कार्य जनवरी 2011 में आरंभ किया गया था। भारतीय विशिष्ट प्राधिकरण ने 2011 की जनगणना के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किया है, इसके अनुसार 2011 की जनगणना के तहत प्रदेश की जनसंख्या लगभग 68.05 लाख थी।
नामांकन अंतर को जानने के लिए 2015 की अनुमानित जनसंख्या का विश्लेषण किया गया, जिसकी वर्तमान आधार नामांकन से आयु के आधार पर तुलना की गई। विश्लेषण के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग की जनसंख्या को पहले ही आधार नामांकन के तहत लाया जा चुका है और उनके आधार नंबरों का सृजन भी किया जा चुका है।