बीमारी या शादी का बहाना बनाकर चुनावी ड्यूटी से बचने की कोशिश करने वाले कर्मचारियों की अब एक नहीं चलेगी।
13 अप्रैल को अमर उजाला के अंक में ‘सर मुझे डायबिटीज, मैं नहीं दे सकता चुनावी ड्यूटी’ शीर्षक से खबर छपने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश मल्होत्रा ने सभी आवेदनों की जांच के आदेश दे दिए हैं।
लोकसभा चुनाव में ड्यूटी से बचने के लिए कई कर्मचारियों ने बहाना बनाकर फर्जी आवेदन किए हैं। किसी ने घर में बच्चे की शादी का बहाना बनाया है।
तो किसी ने बीवी की बीमारी या खुद के अस्वस्थ होने की दलील देकर चुनाव ड्यूटी न लगाने के लिए आवेदन किया है।
‘अमर उजाला’ ने ऐसे ही आवेदनों का खुलासा किया था, जिसके बाद जांच के निर्देश हुए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश मल्होत्रा ने कहा कि सभी आवेदनों को गहराई से देखा जा रहा है। जिनके आवेदन सही होंगे, उन्हें चुनावी ड्यूटी में रियायत दी जाएगी।
बहानेबाज पर होगी कार्रवाई
जो बहानेबाज होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बहानेबाजों को चुनाव ड्यूटी से किसी भी सूरत में राहत नहीं दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि जिला निर्वाचन अधिकारी के पास ड्यूटी रद्द कराने के लिए लगभग साढ़े तीन सौ आवेदन पहुंचे हैं। इनमें से कुछ आवेदन ऐसे हैं जिन्होंने खुद को अस्वस्थ बताते हुए चुनाव ड्यूटी देने में असमर्थता जाहिर की है।
प्रशासन के सामने यह मुश्किल है कि इनमें से कितने आवेदन सही हैं और कितने बहानेबाज हैं। लिहाजा प्रशासन ने सभी आवेदकों को निर्देश जारी किए हैं कि फिलहाल सभी चुनाव के मद्देनजर होने वाली ट्रेनिंग में हिस्सा लेते रहें।
जिले में चुनाव ड्यूटी पर करीब चार हजार कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इन्हें अलग-अलग जगहों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सात मई को मतदान होगा।