उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगलों में भीषण आग लगने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जवाब दाखिल करने के लिए दोनों राज्यों को एक हफ्ते की मोहलत दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 27 मई को होगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को संबंधित मामले में दो याचिकाओं की सुनवाई संयुक्त रूप से की।
इस दौरान हिमाचल प्रदेश के वकील ने कहा कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत चाहिए। उत्तराखंड के वकील ने कहा कि उनका जवाब तैयार है, वे जल्द ही ट्रिब्यूनल में जवाब दाखिल कर देंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता भी मौजूद थे।
पीठ ने 6 सवालों पर मांगे जवाब- एनजीटी ने दोनों राज्यों से कुल छह सवालों पर जवाब मांगे हैं। इनमें जंगल में आग लगने का कारण, ऐसी आपदाओं से बचाने के लिए प्रबंधन व संरक्षण नीति और सरकार के कदमों का ब्योरा शामिल है। एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय से भी इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने स्वत: संज्ञान भी लिया- मालूम हो कि इस मामले पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्यों से जवाब मांगा था। इसके बाद दो याचिकाएं भी एनजीटी में दाखिल हुई थीं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि माफिया हर साल जंगल में आग की घटनाओं को अंजाम देते हैं। उत्तराखंड के जंगल में फरवरी में ही आग लगी थी, इसके बावजूद सरकार और प्राधिकरण देर से हरकत में आए।