नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत राज्य सरकार एक इलेक्ट्रिक व्हीकल पार्क तैयार करेगी। इसे 100 से 200 एकड़ में बनाया जाएगा। प्रदेश में ऐसे पार्कों में इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण प्रोत्साहित किया जाएगा।
120 वोल्ट से कम बैटरी पैक्स वाले वाहनों को लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल
120 वोल्ट से कम बैटरी पैक्स वाले वाहन लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल होंगे। 500 वोल्ट से ज्यादा क्षमता वाले हेवी इलेक्ट्रिक वाहन कहलाएंगे। बसों में भी इतनी ही क्षमता होगी। ई-स्कूटर में 50 किलोमीटर तक चलने के बैकअप वाली इनबिल्ट बैटरी होगी, जिसे घर में चार्ज करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ एक अतिरिक्त बैटरी 50 किलोमीटर तक चलने वाली होनी चाहिए, जिसे रास्ते में बदला जा सकेगा।
हिमाचल प्रदेश में वाहन दुर्घटना मुआवजा दिलाने के लिए पुलिस और बीमा कंपनी को समयबद्ध सेवाएं देनी होंगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में नए नियम बनाए हैं। इसमें पुलिस और बीमा कंपनियों की जिम्मेवारियां तय की हैं। कंपनियोें को समय पर बीमा राशि जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इनका निपटारा 30 दिन में होगा। इन नियमों में दुर्घटनाओं के बाद मुआवजों के दावों के बारे में स्थिति स्पष्ट की गई है। इसमें मुआवजों के दावों को ठीक से भरने के नियम स्पष्ट किए गए हैं।
इनके अनुसार अगर स्क्रूटिनी में किसी दरख्वास्त को अधूरा पाया तो ऐसे में दो सप्ताह के भीतर इसकी कमियों को दुरुस्त करना होगा। आवेदक की पहचान से संबंधित साक्ष्य, पासपोर्ट फोटो, जांच अधिकारी की रिपोर्ट, मेडिकल प्रमाणपत्र आदि दस्तावेजों को भी उपलब्ध करवाना होगा। जांच अधिकारी को दुर्घटनास्थल पर घेरा बनाना होगा और ऐसे कोणों से छायाचित्र लेने होंगे, जिससे सारी चीजें साफ-साफ दिखे। इसके लिए पुलिस के जांच अधिकारी की ही ड्यूटी होगी कि वह दुर्घटनाग्रस्त वाहन से संबंधित बीमा दस्तावेज, पालिसी का पूरा विवरण आदि एकत्रित करें। बीमा कंपनी को भी इस बारे में समय पर सारे तथ्यों को एकत्र कर आगामी कार्रवाई करनी होगी।
एक भी सुझाव नहीं मिला तो सरकार ने जारी की अधिसूचना
नए हिमाचल प्रदेश मोटरयान तृतीय संशोधन नियम 2021 के लिए एक भी सुझाव नहीं मिला है। राज्य सरकार ने किसी सुझाव या आपत्ति के नहीं मिलने के बाद अब इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है।