घर तो जा रहे हैं पर घर बचा कहां है? भूकंप से ऐसी तबाही मची है कि हमारे घरवाले सड़कों पर रातें काट रहे हैं। घर पर कौन कौन जिंदा है, इसका भी पता नहीं चल पा रहा। घर लौट रहे नेपाली लोगों के शब्द तबाही से हुए नुकसान को बताने के लिए काफी हैं।
भूकंप के बाद देश के अन्य राज्यों की तरह हिमाचल से भी हजारों नेपाली अपने वतन के लिए रवाना हो गए हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ये नेपाली सेब बागवानी और अन्य काम छोड़कर नेपाल रुखसत हो गए हैं।
बड़ी संख्या में नेपालियों के अपने वतन जाने का सिलसिला आगामी दिनों में भी जारी रहेगा। नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था के ठप होने से हिमाचल के कई नेपालियों का वहां संपर्क भी नहीं हो रहा है।
फोन पर बताया, बड़ी तबाही हो गई
नेपालियों के ये दल शिमला, सिरमौर, सोलन, कांगड़ा, कुल्लू आदि जिलों से नेपाल को रवाना हुए। कोटखाई में कार्यरत राम बहादुर शिमला जिले से करीब 500 नेपाली नेपाल रवाना हो चुके हैं। बाकी अन्य भी जा रहे हैं।
धर्मशाला में रेहड़ी लगाकर कारोबार कर रहे अर्जुन सिंह निवासी नेपालगंज ने बताया कि भूकंप से उनके घर में नुकसान हुआ है। नेपाल से उनके घरवालों ने उन्हें फोन पर सूचना दी है। कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी ली जा रही है।
फोन पर रिश्तेदारों ने कहा कि देखते ही देखते तबाही हो गई। बड़ी इमारतें भी क्षण भर में ही जमींदोज हो गईं। नेपालगंज निवासी अशोक कुमार ने कहा कि भूकंप से नेपाल में काफी तबाही हुई है। उनका परिवार नेपाल में ही रह रहा है।
बसों में नेपाल रवाना हुए लोग
सिरमौर जिले से करीब ढाई सौ नेपाली अपने गांवों के लिए रवाना हो चुके हैं। तीन दर्जन नेपाली मूल के कामगार शनिवार देर रात शिमला से टनकपुर जाने वाली बस से अपने घरों को रवाना हो चुके थे, जबकि अन्य रविवार सुबह अपने घरों को निकल पड़े हैं।
जिले से करीब 250 नेपाली नेपाल रवाना हो गए हैं। कुल्लू जिले में वर्तमान में 355 लोग नेपाल मूल के रह रहे हैं। मूल प्रवाह अखिल भारतीय भारत नेपाल एकता समाज कुल्लू के अध्यक्ष जय बहादुर और महासचिव पिशल बिट्टी ने बताया कि सौ लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने नेपाल के लिए रवाना हो गए हैं।
सुबाथू में सुनार की दुकान चलाने वाले राजकुमार सुनार ने नम आखें करते हुए बताया कि भूकंप से उनका परिवार बेघर हो चुका है। वह जल्द ही नेपाल जा रहे हैं।