नेहा ने बताया कि उन्होंने रोमानिया बॉर्डर पर फ्लाइट के इंतजार में माइनस 5 डिग्री तापमान में दो दिन और रातें बिना कंबल गुजारीं। कहा कि बॉर्डर पर भारतीय और नाइजीरियन विद्यार्थियों से शराब पीकर धक्कामुक्की की जाती रही।
बताया कि वह बड़ी चुनौतियों का सामना कर घर पहुंची हैं।
कई चुनौतियों का सामना कर हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर के जेल रोड की नेहा शनिवार सुबह करीब सात बजे यूक्रेन से घर पहुंचीं। नेहा की आंखों में इसकी खुशी साफ झलक रही थी। पिता रमन सूद ने बेटी को गले से लगा लिया। मां सीता सूद भी बेटी को देखकर खुश हो गईं। नेहा ने बताया कि उन्होंने रोमानिया बॉर्डर पर फ्लाइट के इंतजार में माइनस 5 डिग्री तापमान में दो दिन और रातें बिना कंबल गुजारीं। कहा कि बॉर्डर पर भारतीय और नाइजीरियन विद्यार्थियों से शराब पीकर धक्कामुक्की की जाती रही। बताया कि वह बड़ी चुनौतियों का सामना कर घर पहुंची हैं।
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26 फरवरी को यूक्रेन से बस में अन्य साथियों के साथ निकलीं। रोमानिया बॉर्डर से आठ किलोमीटर पीछे बस से उतार दिया गया। बर्फ पर 8 किलोमीटर पैदल सफर कर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। भारी भीड़ थी। करीब पांच हजार विद्यार्थी और लोगों का जमावड़ा था। भारतीय और नाइजीरियन लड़के-लड़कियों को आगे जाने नहीं दिया जा रहा था। दो दिन खाने को एक कैंप के माध्यम से बिस्किट और गर्म पानी मिला। नेहा ने बताया कि उनकी डॉ. सुनील ने बहुत मदद की और भारत पहुंचाने तक भूमिका निभाई। यूक्रेन से जैसे ही नेहा मंडी पहुंची तो मां ने उसकी आरती उतारी और उसके पिता ने उसे आंसू भरी आंखों से गले लगाया।