मूर्तिकार पिता के हुनर को संजोए रखने के लिए हिमाचल प्रदेश के चंबा की बिटिया ने जिम्मेवारी उठाई है। करीब 25 दिनों में मां काली की मूर्ति तैयार कर दी है। इसे मां ज्वालाजी मंदिर से सुल्तानपुर वार्ड के माई का बाग मोहल्ला में माता की जोत के साथ रखा जाएगा। जिला मुख्यालय के साथ चमेशनी मोहल्ला निवासी 37 वर्षीय लता ने बताया कि उसने मां काली की मूर्ति बनाने के लिए पराली, लाल मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस, कच्ची रस्सी और मलमल के कपड़े का इस्तेमाल किया है। अलग-अलग रंगों से मां काली की मूर्ति को सजाया गया है।
लता ने पिछले वर्ष कोरोना काल के दौरान श्रीराम लीला क्लब चंबा के लिए रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाए थे। उनके पिता श्रीराम लीला क्लब चंबा के बहुत पुराने सदस्य थे और बेहतरीन मूर्तिकार थे। लता ने बताया कि जब उनके पिता पूर्ण चंद मां काली की मूर्ति बनाते थे तो वह उनके साथ सहायता करती थी। इसी बीच इस कला की बारीकियों को सीख लिया। पिता के चार वर्ष पहले देहांत के बाद मूर्ति बनाने का काम बंद कर दिया था। लोग बार-बार लता के पास आकर मूर्ति बनाने के लिए आग्रह करते थे। इसके बाद उसने पिता के हुनर को जिंदा रखने के लिए दोबारा से मूर्ति बनाने का फैसला लिया।