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Shimla News: हड़ताल पर नहीं जाने का शपथपत्र लेने पर नगर निगम से जवाब तलब

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राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने सफाई कर्मचारियों से शपथ पत्र लेने पर मांगा स्पष्टीकरण, इसके बाद होगी कार्रवाई
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आयोग की बैठक में सफाई कर्मचारियों ने उठाए मुद्दे
बोले-जर्जर आवासों में रह रहे हैं कर्मी, नौकरी पक्की नहीं

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही सैहब सोसायटी के कर्मचारियों से भविष्य में किसी हड़ताल में शामिल न होने का शपथ पत्र लिए जाने का मामला तूल पकड़ गया है।
हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले में नगर निगम शिमला से स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने कहा है कि स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में सोमवार को आयोजित राज्य अनुसूचित जाति आयोग की समीक्षा बैठक में सफाई कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न समस्याएं और मांगें आयोग के समक्ष रखीं। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने की। आयोग के संज्ञान में लाया गया कि नगर निगम ने हाल ही में हड़ताल पर गए 41 सफाई कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। हालांकि बाद में उनकी सेवाएं बहाल कर दी गईं, लेकिन बहाली के दौरान कर्मचारियों से यह शपथ पत्र लिया गया कि वह भविष्य में किसी हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। इस पर आयोग ने नगर निगम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बीच हुई बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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बैठक में आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की लंबित मांगों का जल्द समाधान किया जाएगा। उन्होंने नगर निगम को शिमला को मॉडल सिटी बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोग के संज्ञान में आया है कि कई स्थानों पर सफाई कर्मियों को सिर और पीठ पर कूड़ा ढोना पड़ रहा है। इस व्यवस्था में सुधार कर ऑटोमेशन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जा रही यूनिफॉर्म, गम बूट और रेनकोट की गुणवत्ता की भी जांच कराने को कहा।


सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष नागेश वाल्मीकि ने कहा कि कई कर्मचारी जर्जर सरकारी आवासों में रहने को मजबूर हैं, जिनकी वर्षों से मरम्मत नहीं हुई है। इससे उनके परिवारों की सुरक्षा भी खतरे में है। आयोग के सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा ने कहा कि वाल्मीकि समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र और बोनाफाइड प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही दिक्कतों का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।

नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि कामगार योजना के तहत अब तक कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सफाई कर्मचारियों को 3,457 जोड़ी ग्लव्स, 3,428 मास्क, 1,118 रेनकोट और 62 जोड़ी गम बूट उपलब्ध कराए गए हैं। नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के 483 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 150 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि सैहब सोसायटी के माध्यम से 931 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में करुणामूलक आधार पर सात लोगों को नियुक्ति भी दी है।
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खाली पद और स्थायी नौकरी के मुद्दे उठे
बैठक के दौरान विनोद कुमार ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के पदों की संख्या लगातार घटती जा रही है। कर्मचंद भाटिया ने कर्मचारियों को स्थायी नौकरी दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आज भी कई सफाई कर्मियों को पीठ पर कूड़ा ढोना पड़ता है। रवि कुमार ने हड़ताल के दौरान कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने का मुद्दा उठाया। वहीं, सैहब सोसायटी के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि कर्मचारियों पर एस्मा लागू कर दिया जाता है, लेकिन उन्हें उससे जुड़े आवश्यक लाभ नहीं मिलते।
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