मंगलवार को वाकआउट के बाद प्रदेश विधानसभा परिसर में अग्निहोत्री ने कहा कि इस पूरे मामले के पीछे हिमाचल से बाहर के कुछ आला अधिकारियों का हाथ है। इनका हिमाचल के हितों से कोई खास वास्ता नहीं है।
जयराम सरकार को सत्ता में आए हुए डेढ़ माह का वक्त हुआ है कि हिमाचल की जमीनें बेचने की बातें होने लगी हैं। प्रदेश में जयराम मुख्यमंत्री बने तो कहा गया कि पीढ़ी परिवर्तन हुआ है। क्या धारा 118 को खत्म करने के लिए और हिमाचल को बेचने के लिए ही ये पीढ़ी बदलाव हुआ है।
कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी। अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए ही इस धारा का प्रावधान किया था। पूर्व वीरभद्र सरकार ने भी उद्योगों को 45 दिन में जमीन उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की है। इससे ज्यादा कुछ भी करने की जरूरत नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल को किसी भी हाल में बिकने नहीं दिया जाएगा। वीरभद्र ने भी राज्य विधानसभा परिसर में पत्रकारों से यह बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा हिमाचल के हितों की रक्षा की है।
भाजपा की सरकार को हिमाचल के हितों से कोई खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। नादौन के विधायक एवं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी कहा कि कांग्रेस धारा 118 से छेड़खानी के इस मामले को बर्दाश्त नहीं करेगी और जनता के बीच ले जाएगी।