कैंसर, ह्रदय रोग, स्ट्रोक और मांसपेशियों के रोगों से ग्रसित मरीजों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी
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अस्पताल में औसतन 20 से 25 मरीजों के किए जाते है एमआरआई टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में एमआरआई मशीन खराब हो गई है। मशीन के खराब होने के बाद जांच करवाने आए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
अस्पताल में मरीजों को पेश आ रही इस परेशानी का हल प्रबंधन भी नहीं कर पा रहा है। आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में कैंसर, ह्रदय रोग, स्ट्रोक, मांसपेशियों में चोट, हड्डियों में फ्रेक्चर और जोड़ों में चोट जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए एमआरआई टेस्ट करवाया जाता है। लेकिन मशीन खराब होने के बाद मरीजों को इन टेस्टों को करवाने के लिए अब इंतजार करना होगा। कई महीनों बाद टेस्ट की डेट मिलती है। अस्पताल में हर रोज करीब 25 मरीजों के एमआरआई टेस्ट होते हैैं। अब मशीन के खराब होने के बाद मरीजों को कई दिन और इंतजार करना होगा। हालांकि बताया जा रहा है कि मशीन ठीक करने के लिए इंजीनियर को बुला लिया है लेकिन सोमवार शाम तक भी इंजीनियरों के न आने से आने वाले कुछ दिनों तक इस सुविधा से मरीजों को वंचित रहना पड़ सकता है।
कौन खरीदेगा नई मशीन संशय बरकरार
अस्पताल में एमआरआई की एक ही मशीन है। यह मशीन वर्ष 2006 में लगी थी। अठारह साल से यह मशीन चल रही है। ऐसे में इसकी समयावधि भी पूरी हो गई है। सरकार ने नई मशीन खरीद के लिए 27 करोड़ रुपये जारी किए हैं लेकिन मशीन की खरीदारी नहीं हो पाई है। सरकार के नियम हैं कि 50 लाख रुपये से अधिक की कीमत वाली मशीनों या अन्य चीजों की खरीदारी संस्थान नहीं कर सकते। ऐसे में अब संशय यह है कि क्या इसकी खरीदारी सरकार करेगी या फिर आईजीएमसी प्रबंधन। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में विशेष अनुमति ली जाएगी। लेकिन यह कब तक मिलेगी यह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैकड़ों मरीजों को परेशान होना पड़ेगा। वहीं उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण भाटिया ने कहा कि मशीन खराब होने की सूचना मिलने के बाद इंजीनियर को बुला लिया है। जल्द मशीन ठीक हो जाएगी।