प्रदेश में 30.8 फीसदी बच्चे कुपोषित, ग्यारह हजार घरों में बच्चों पर किया था सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। बच्चों पैदा होने के बाद छह महीनों तक मां को स्तनपान करवाना चाहिए। स्तनपान न करवाने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। बच्चों में बीमारी से लड़ने वाली एंटीबॉडी भी नहीं बन पाती है। आईजीएमसी की कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तृप्ति चौहान ने विश्व स्तनपान दिवस पर यह जानकारी दी।
कम्यूनिटी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तृप्ति चौहान ने बताया कि वर्ष 2019-20 में नेशनल फैमिली हेल्थ की ओर से सर्वे करवाया था। प्रदेश के 11 हजार घरों में 5 साल से कम आयु के बच्चों पर ये सर्वे हुआ। सर्वे में सामने आया कि 30.8 फीसदी बच्चे कुपोषित पाए गए थे। इनमें अधिकांश बच्चों की हाइट कम थी। हालांकि गांव के बच्चों की तुलना में शहरी बच्चों की 4.5 फीसदी हाइट अधिक थी। इसके अलावा चंबा के 42.6 फीसदी बच्चों की हाइट कम पाई गई थी। 25.5 फीसदी बच्चे कम वजन के थे, जबकि 17.4 फीसदी बच्चे कमजोर थे। वहीं 19 फीसदी भरपूर मात्रा में डाइट दी गई थी।
दो साल तक करवाए ब्रेस्ट फीडिंग
डॉक्टरों का कहना है कि जन्म से दो साल तक माताएं अपने बच्चों को स्तनपान करवाए। ऐसा करने से जहां 30 से 40 की उम्र के बाद होने वाली शुगर, डायबिटीक, ल्यूकेमिया और कैंसर जैसी बीमारी नहीं होगी। एंटीबॉडी बनने के बाद शरीर अन्य बीमारियों से भी लड़ने में सक्षम होगा। इसके अलावा माताएं अपने बच्चों को फल आदि भी खिला सकती है। मां का दूध शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत ही जरूरी है। यह शिशु को निमोनिया, डायरिया से भी बचाता है। इसलिए बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य पिलाना चाहिए।