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गांधी के इस्तीफे पर मोदी सरकार खामोश

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भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला के चेयरमैन पद से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी के इस्तीफे पर मोदी सरकार ने अभी तक निर्णय नहीं लिया है।
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गोपालकृष्ण गांधी ने यह इस्तीफा 19 मई को दे दिया था। इसके बावजूद नौ दिन बीतने पर भी इस पर फैसला नहीं हुआ है।

एक मत यह भी है कि मोदी सरकार जीके गांधी को इस पद पर बने रहने को भी कह सकती है। इसलिए नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर अभी कोई सुगबुगाहट नहीं है।
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2012 को चेयरमैन बने थे गांधी

गोपालकृष्ण गांधी को इस संस्थान में 24 फ रवरी 2012 को बतौर अध्यक्ष नियुक्ति दी गई थी। पूर्व आईएएस अधिकारी गोपालकृष्ण गांधी ने यह इस्तीफा मोदी सरकार के पक्ष में चुनाव नतीजे आने के बाद दिया। जीके गांधी का सेवाकाल जनवरी 2015 में पूर्ण होना था।

यह मालूम रहे कि गोपालकृष्ण गांधी इस संस्थान के ऐतिहासिक भवन के जीर्णोद्धार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से 50 करोड़ रुपये की केंद्रीय आर्थिक सहायता को मंजूर करवाने में सफल रहे हैं।

1884 में वायसरीगल लॉज के रूप में निर्मित इस ऐतिहासिक भवन को कला संकाय और सामाजिक विज्ञानों का अनुसंधान संस्थान वर्ष 1965 में बनाया गया। संस्थान के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी अनुराग शर्मा ने मंगलवार को कहा कि राज्य मानव संसाधन मंत्रालय ने अभी तक जीके गांधी के इस्तीफे पर निर्णय नहीं किया है।
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