मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आम बजट को निराशाजनक करार दिया है। वहीं प्रदेश की झोली में आईआईएम मिलने पर उसका स्वागत भी किया। उन्होंने कहा है कि यह बजट अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है।
केंद्र सरकार यह दर्शाने में असफल रही है कि वह किस प्रकार भारतीय आर्थिकी को सुदृढ़ करेगी। बजट में केंद्र सरकार की ओर से बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि जैविक खेती, आपदा प्रबंधन, पर्यटन सर्किट का विकास, रेल नेटवर्क का विस्तार, औद्योगिक पैकेज और उत्तर-पूर्वी राज्यों की तर्ज पर धन राशि के आवंटन जैसे मामलों में हिमाचल प्रदेश को वरीयता मिलनी चाहिए थी।
महंगाई को रोकने के लिए कुछ नहीं किया
बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए कुछ नहीं किया गया है, जबकि इससे आम आदमी सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है। वित्तीय घाटा 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गया है और इस कारण अधिक ऋण उठाने से कीमतों में और अधिक वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने बजट में वन रैंक वन पेंशन योजना के लिए 1000 करोड़ रुपये की पर्याप्ता पर शंका जताई। कहा कि इस योजना को यूपीए सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया था और इसके लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता है।
आयकर स्लैब में बढ़ोतरी आंशिक है और इससे करदाताओं को वांछित राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने हिमाचल के लिए आईआईएम की घोषणा का स्वागत किया।
नेता लड़ते रहे और हाथ से निकल गया एम्स
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड साइंस (एम्स) को लेने में हिमाचल प्रदेश एक बार फिर चूक गया। देश के आम बजट में प्रदेश के लिए एम्स स्थापित करने को लेकर कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
जबकि, 20 दिन पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को डीओ लेटर लिखकर जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा था।
इसके तत्काल बाद मुख्यमंत्री ने खुद ही टांडा मेडिकल को एम्स में अपग्रेड करने को कहा था। बावजूद इसके एम्स न मिलने पर इसे कांग्रेस के दो नेताओं की लड़ाई से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
कौल सिंह नेरचौक तो बाली टांडा में चाहते थे एम्स
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह इसे नेरचौक तो खाद्य मंत्री जीएस बाली इसे टांडा में ही चाहते हैं। क्या इस विवाद के कारण इस बार यह मौका हाथ से छिटका?
प्रदेश में एक भी स्वास्थ्य रिसर्च सेंटर नहीं है। इससे सूबे के मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। गंभीर मरीजों को इलाज कराने के लिए चंडीगढ़ पीजीआई सहित दूसरे राज्यों की ओर रुख करना पड़ता है।
एम्स की लगातार मांग की जा रही थी। लेकिन, 10 जुलाई को पेश आम बजट में हिमाचल में एम्स खोलने का कोई प्रावधान नहीं किया गया। इससे राज्य के लोगों को झटका लगा है।