हिमाचल के ग्रामीण विकास विभाग के खाते में वर्तमान समय में करीब 1829 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हो पाई है। देश और प्रदेश में लॉकडाउन के कारण विभाग की राशि विभिन्न मदों पर खर्च नहीं हो पाई है। इस राशि में से 400 करोड़ राशि की किस्तें 14वें वित्तायोग से दिसंबर 2019 में प्रदेश सरकार के खाते में जमा हुईं। राज्य के ग्रामीण विकास विभाग में मनरेगा के लिए योजना के तहत करीब एक हजार करोड़ की राशि मंजूर है, लेकिन यह संबंधित विभाग ग्रामीणों क्षेत्र के विकास पर व्यय नहीं कर पाया।
यह राशि मार्च, 2020 तक व्यय की जानी थी। मनरेगा के कामों के बाद समय-समय पर यह स्वीकृत राशि जारी होती है। लॉकडाउन के कारण लंबे समय तक मनरेगा के काम न होने से यह राशि व्यय नहीं हो पाई। हालांकि, अब पंचायतों में मनरेगा के काम आरंभ कर दिए गए हैं। इसके अलावा पंचायतों में कामों के लिए 14वें वित्तायोग से अक्तूबर और दिसंबर की दो किस्तें 400 करोड़ जारी हुईं। इसके बाद लॉकडाउन के कारण यह राशि भी ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में व्यय नहीं हो पाई है। इसके अलावा 15वें वित्तायोग ने भी हिमाचल के लिए 429 करोड़ की राशि मंजूर की है।
यह राशि विभाग के नाम पर बिना खर्च में शामिल है। 15वें वित्तायोग से अभी तक प्रदेश सरकार को यह राशि नहीं मिली है। राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव डॉ. आरएन बत्ता कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण विभाग मनरेगा के कामों पर खर्च नहीं कर पाई है। मनरेगा के काम जैसे-जैसे होते हैं, यह राशि जारी होती रहती है। 14वें वित्तायोग की दो किस्तें 400 करोड़ की दिसंबर में आई थीं। 15वें वित्तायोग से 429 करोड़ की राशि अभी नहीं मिली है।